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मुंगेर के गुमशुदा युवक ने पटना के होटल में फांसी लगाकर की आत्महत्या, करोड़ों के कर्ज का खुलासा

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发表于 2025-10-28 10:24:49 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

पटना के होटल में फांसी लगाकर की आत्महत्या



जागरण संवाददाता, पटना। कोतवाली थाना क्षेत्र के होटल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाले उमेश कुमार सिंह की गुमशुदगी का केस मुंगेर के कासिम बाजार थाने में दर्ज था। कोतवाली थाने की पुलिस ने आत्महत्या मामले में यूडी केस दर्ज कर संबंधित थाने की पुलिस को घटना की सूचना दी।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गुरुवार की सुबह गुमशुदा केस के अनुसंधानकर्ता सोनू कुमार पटना पहुंचे। कोतवाली थाने की पुलिस ने होटल के कमरे से बरामद सामान और सीसीटीवी फुटेज केस के आइओ को सौंप दिया। शव का पीएमसीएच में पोस्टमार्टम हुआ।  
लोगों ने जमीन बेचकर पैसे दिए

इसके बाद शव को स्वजनों को सौंप दिया गया। डीएसपी कोतवाली कृष्ण मुरारी प्रसाद ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई हैं कि उमेश ने बहुत लोगों से पैसे लिए थे। गांव के ही कई लोगों से पैसे ले रखे थे।  

कई लोगों ने जमीन बेचकर पैसे दिए थे। रकम करोड़ों में बताई जा रही है। कासिम बाजार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जो भी साक्ष्य मिले थे, उसे इस केस के आइओ को सौंप दिया गया।

बीते 17 तारीख से लापता थे। उनके लापता होने की शिकायत भी मुंगेर के कासिम बाजार थाने में दर्ज थी। लापता होने के बाद उनकी स्कूटी, कपड़ा और जूता दुमंठा घाट पर मिला था।  
पैसा वापस नहीं मिलने से उमेश की स्थिति बिगड़ गई

इसी बीच बुधवार को एक होटल में उमेश कुमार सिंह ने आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि वह लोगों से दो से तीन प्रतिशत ब्याज पर रकम लेकर साहूकारों को तीन प्रतिशत पर लगाते थे और ब्याज की राशि समय पर लौटाकर विश्वास जीतते थे।  

शुरुआत में छोटी रकम लेकर काम शुरू किया, बाद में लाखों रुपये तक उठाने लगे। कई लोगों ने विश्वास में आकर जमीन तक बेचकर रुपये दिए। कुछ माह से साहूकारों द्वारा पैसा वापस नहीं मिलने से उमेश की स्थिति बिगड़ गई। ऐसे में जिन लोगों ने उन्हें पैसा दिया, वह वापस करने के लिए दबाव बनाने लगे।  
बच्चों को सुरक्षा देने की मांग

आत्महत्या के पीछे पैसे की लेनदेन की बातें भी सामने आ रही है। उमेश के पैकेट से दो सुसाइड नोट मिले थे, जिसमें एक पत्नी के नाम लिखा गया था। उसमें खुद को असहाय बताते हुए माफी मांगी गई थी।  

जबकि दूसरा सुसाइड नोट सरकार और जिला प्रशासन के नाम पर लिखा गया था। इसमें खुद को निर्दोष और एजेंसी से जांच की मांग की गई है। मेरे और मेरे बच्चों को कृपया सुरक्षा मुहैया कराई जाए और घटना की निष्पक्ष जांच हो।  

छानबीन में यह भी बात सामने आई है कि शुरू में वह ब्याज के रुपए मिलते ही खुद से इस रुपए को घर घर घूमकर पहुंचा देते थे। तय दिन पैसे देने वालों के पास पैसा पहुंच जाता था। इससे विश्वास बढ़ता गया और फिर वह मोटी रकम उठाने लगे।
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