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शर्मनाक: हापुड़ में डीजल नहीं मिलने से खड़े हो गए पालिका के वाहन, धनतेरस पर नहीं उठा कूड़ा

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发表于 2025-10-28 09:59:26 | 显示全部楼层 |阅读模式
  



जागरण संवाददाता, हापुड़। पालिका के वाहनों की डीजल व्यवस्था पारदर्शी करने का प्रयास शनिवार को शहर के लोगों पर भारी पड़ गया। धनतेरस होने के बावजूद शहर में डोर-डोर कूड़ा कलेक्शन प्रणाली फेल हो गई। डीजल नहीं मिलने से पालिका के वाहन खड़े हो गए। इससे शहर में गंदगी और कूड़ा फैल गया। दरअसल डीएम के आदेश से बौखलाए एक जनप्रतिनिधि ने डीजल भुगतान के चेक पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। जिससे पंप स्वामी का डीजल बकाया का भुगतान नहीं हो पाया और उन्होंने वाहनों को डीजल देने से इंकार कर दिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

दोपहर में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद डीजल का आंशिक भुगतान हुआ। उसके बाद कूड़े का उठान हो सका, लेकिन मोहल्लों में सफाई को लेकर हालात खराब रहे। वहीं, पालिका अधिकारियों का दावा है कि शनिवार की सुबह ही भुगतान करा दिया गया। सभासद नितिन पाराशर ने बताया कि उनके वार्ड में कोई डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन वाली गाड़ी नहीं पहुंची। इस कारण घरों से कूड़ा नहीं उठ सका।
यह रही स्थिति -

शहर के वार्डों में साफ-सफाई व मुख्य मार्गों और बाजारों से कूड़ा उठवाने के लिए प्रतिदिन पालिका द्वारा वाहनों का संचालन किया जाता है। इसके लिए पालिका के वाहनों में पंप से पेट्रोल व डीजल भरवाया जाता है। पालिका के सूत्रों के अनुसार पालिका पर बकाया बढ़कर करीब 40 लाख रुपये पहुंच गया है। इस पर अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वह प्रतिमाह का भुगतान अबसे लगातार कराते रहेंगे और बकाया के कुछ हिस्से का भुगतान भी हर महीने के भुगतान में जोड़कर कराया जाएगा।

इस पर पंप संचालक ने डीजल व पेट्रोल की आपूर्ति देनी आरंभ की। इसी सप्ताह सोमवार को हुई बोर्ड बैठक के बाद अन्य ठेकेदारों का तो भुगतान हो गया था, लेकिन पंप संचालक का भुगतान नहीं किया गया था। वहीं, पालिका अधिकारियों का दावा है कि शनिवार की सुबह ही भुगतान करा दिया गया। सभासद नितिन पाराशर ने बताया कि उनके वार्ड में कोई डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन वाली गाड़ी नहीं पहुंची। इस कारण घरों से कूड़ा नहीं उठ सका। चेयरपर्सन को कई बार काल की गईं, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं की।
यह रहा कारण

पालिका सूत्रों के अनुसार डीजल और पेट्रोल में बड़ी घपलेबाजी के आरोप लग रहे थे। पालिका से जुड़े कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपने निजी वाहनों में भी पालिका के खाते से ईंधन डलवा रहे थे। एक-एक जनप्रतिनिधि के कई वाहनों में पालिका के खाते से डीजल-पेट्रोल प्रयोग किया जा रहा था। ऐसा हापुड़ के साथ ही अन्य पालिकाओं में भी घपला होने की सूचना मिल रही थीं। इस पर डीएम ने डीजल-पेट्रोल में पारदर्शिता लाने के आदेश दिए थे। इसके चलते पालिकाओं के सभी वाहनों में जीपीएस चालू रखने, लागबुक अपडेट रखने आैर डीजल-पेट्रोल लेने के दौरान सीसीटीवी फुटेज चालू रखने आदि के आदेश दिए थे।
जनप्रतिनिधि हो गए नाराज

डीजल-पेट्रोल खरीद की नई प्रक्रिया से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के निजी वाहनों को डीजल-पेट्रोल मिलना बंद हो गया। इसमें उनके जनप्रतिनिधि के वाहन भी चपेट में आ गए, जिनके हस्ताक्षर से पंप के भुगतान कका चेक जाता है। इनके द्वारा पंप के भुगतान चेक पर हस्ताक्षर नहीं किए गए।

शहर से बाहर होने की बात कहकर भुगतान का चेक रोका जाता रहा। जिससे पंप संचालक ने पालिका के सभी वाहनों को शुक्रवार शाम से डीजल-पेट्रोल देना बंद कर दिया। उसके चलते शनिवार को कूउ़ा उठान नहीं हो सका। दोपहर में एक वरिष्ठ अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद वाहनों को पेट्रोल-डीजल दिया गया।



कोई बड़ा मामला नहीं है। शुक्रवार को डीजल-पेट्रोल की कमी होने के चलते पंप संचालक ने नहीं दिया था। कुछ घंटे बाद ही डीजल-पेट्रोल मिलने लगा था। शहर की सफाई को किसी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।  
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- संजय मिश्रा- ईओ-नगर पालिका हापुड़
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