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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उर्वरक मिलने की दिक्कतों को दूर करने के लिए प्रदेश के किसान तेजी से बहुद्देश्यीय प्रारंभिक कृषि ऋण समितियों (एम-पैक्स) की सदस्यता ले रहे हैं।
पिछले 34 दिनों में ही 11 लाख किसानों ने एम-पैक्स की सदस्यता ली है। किसानों द्वारा समितियों का सदस्य बनने से जिला सहकारी बैंकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। नये सदस्य बनने से इन बैंकों में नये खाते खुलने तथा अंशपूंजी के रूप में लगभग 255 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
सहकारिता विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एम-पैक्स के सदस्य किसानों को खाद-बीज के वितरण में प्राथमिकता देने के साथ ही महज तीन फीसदी ब्याज पर अल्पकालिक कृषि ऋण दिए जाने की व्यवस्था है। इसके साथ ही एम-पैक्स पर धान, गेहूं व अन्य फसलों को एमएसपी पर खरीदा जाता है, जिसमें सदस्य किसानों को प्राथमिकता दी जाती है।
एम-पैक्स की अन्य सेवाएं भी सदस्य किसानो को प्राथमिकता के आधार पर दिए जाने का प्रविधान है। उर्वरक मिलने में कोई दिक्कत न हो इसलिए किसानों का रूझान एम-पैक्स की सदस्यता के प्रति बढ़ा है।
उच्चाधिकारियों के मुताबिक मौजूदा समय में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 8140 एम-पैक्स कार्यरत हैं। पहले से इन समितियों से करीब एक करोड़ किसान सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं। इधर 12 सितंबर से शुरू हुए सदस्यता अभियान में अब तक करीब 11 लाख नये सदस्य बन गए हैं।
नये सदस्यों ने जिला सहकारी बैंकों में करीब 1.25 लाख नये खाते खुलवाए हैं। जिससे इन बैंकों में 230 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। किसानों द्वारा लिए गए शेयरों से मिले 25 करोड़ रुपये भी इन बैंकों में जमा हुए हैं। |
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