找回密码
 立即注册
搜索
查看: 389|回复: 0

इंदौर में इटालियन डिजाइन वाली कोठी बनवा रहा था धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, जांच में हैरान करने वाले खुलासा

[复制链接]

8万

主题

-651

回帖

26万

积分

论坛元老

积分
261605
发表于 2025-10-28 09:44:54 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

रिटायर्ड आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इंदौर में भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे सेवानिवृत्त जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के ठिकानों पर लोकायुक्त टीम की कार्रवाई जारी है। गुरुवार को टीम ने काउंटी वाक टाउनशिप में भदौरिया की निर्माणाधीन कोठी की जांच की। अधिकारियों ने भव्य कोठी की डिजाइन देखकर आश्चर्य व्यक्त किया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

कोठी लगभग 4700 वर्गफीट के प्लाट पर बनाई जा रही है, जिसमें 10000 वर्गफीट का निर्माण होना है। इसे इटालियन डिजाइन में तैयार किया जा रहा है, जिसमें होम थिएटर, डिजाइनर सीढ़ियां, बेडरूम, हाल और गार्डन शामिल हैं। इसके लिए लाखों रुपये के झूमर और चीन से फर्नीचर मंगवाए गए हैं।

कोठी निर्माण की लागत लगभग तीन करोड़ 36 लाख रुपये आंकी गई है, जबकि प्लाट खरीद समेत कुल लागत 10 करोड़ से अधिक है। भदौरिया ने इस प्लाट का सौदा अपने बेटे सूर्यांश के नाम से किया था।
भदौरिया के बैंक खातों की जांच में 1.26 करोड़ रुपये मिले

लोकायुक्त के एसपी डॉ. राजेश सहाय के अनुसार भदौरिया के बैंक खातों की जांच में 1.26 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा, 13 लाख रुपये की 21 बीमा पालिसी और चार लाकर की जानकारी भी सामने आई है। पत्नी सीमा भदौरिया के नाम से बैंक आफ बड़ौदा में एक लॉकर होने की जानकारी मिली है। फिलहाल, खाते फ्रीज कर दिए गए हैं और लाकर खोलने के लिए पत्र लिखा गया है।
भदौरिया ने कई जानकारी छुपाई- एसपी

एसपी के मुताबिक, भदौरिया द्वारा कई जानकारी छुपाई गई हैं। पता चला है कि उसका मानपुर क्षेत्र में भव्य फार्म हाउस भी है। हालांकि, यह दामाद राघव के नाम पर है। राघव शराब कारोबारी एके सिंह का गोद लिया बेटा है। टीम फॉर्म हाउस और आलीराजपुर में भी सर्चिंग कर रही है। बता दें कि भदौरिया ने आबकारी विभाग में उपनिरीक्षक के पद से सेवा शुरू की और जुलाई 2025 में डीईओ के पद से सेवानिवृत्त हुए। 38 साल की सेवा में उनकी आय दो करोड़ रुपये रही।
मप्र में अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने से अटके भ्रष्टाचार के 343 मामले

मध्य प्रदेश में अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने के कारण 2013 से 2019 के बीच लोकायुक्त द्वारा पकड़े गए 343 मामलों में न्यायालय में चालान पेश नहीं हो सके हैं। इस विषय पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया।

याचिका में यह उल्लेख किया गया था कि अभियोजन स्वीकृति में देरी के कारण 52 आरोपितों की मौत हो गई है, जिससे मामले स्वत: समाप्त हो गए हैं। लोकायुक्त कार्यालय पहले लंबित मामलों की जानकारी वेबसाइट पर साझा करता था, लेकिन 2020 से यह सेवा बंद कर दी गई है।

इसे भी पढ़ें: पांच दिसंबर तक WAQF संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य, अन्यथा खत्म कर दिया जाएगा वक्फ का दर्जा
您需要登录后才可以回帖 登录 | 立即注册

本版积分规则

Archiver|手机版|小黑屋|usdt交易

GMT+8, 2026-1-18 09:21 , Processed in 0.153744 second(s), 24 queries .

Powered by usdt cosino! X3.5

© 2001-2025 Bitcoin Casino

快速回复 返回顶部 返回列表