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जागरण संवाददाता, देवरिया। एंटी करप्शन लखनऊ की टीम ने तहसील के आर के दफ्तर के एक प्राइवेट कर्मचारी अरविन्द श्रीवास्तव को घूस लेते हुए पकड़ा और विरोध होने पर छोड़ भी दिया । प्राइवेट कर्मचारी लगभग 20 वर्षो से आर के दफ्तर में जमा हुआ है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्राइवेट कर्मचारियों के माध्यम से धन वसूली होने शिकायत मिलती है। और उसी कड़ी में एक व्यक्ति ने एंटी करप्शन की टीम को अपने मामले में प्राइवेट कर्मचारी अरविंद श्रीवास्तव द्वारा घूस लेने की मांग करने की सूचना दी थी जिसको एंटी करप्शन टीम ने मौके पर पकड़ा और तहसील के गेट तक लेकर गई थी तब तक कुछ लोगों और अधिवक्ताओं ने विरोध किया और कहा कि यह प्राइवेट कर्मचारी है इसके असली गुनहगार आर के और नायब तहसीलदार को पकड़ने की आवश्यकता है। इस पर एंटी करप्शन की टीम बैक फुट पर आ गई और प्राइवेट कर्मचारी को छोड़ दिया गया। एंटी करप्शन टीम बैकफुट होकर चली गई।
तहसील बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विश्व विजय मल्ल और अन्य अधिवक्ताओं ने दो दिन पहले नायब तहसीलदार रुद्रपुर अनिल तिवारी के न्यायालय और कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिकायत की थी। राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ को एक पत्र लिखकर नायब तहसीलदार अनिल तिवारी के कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्राइवेट कर्मचारियों के नाम पर पर 17 बिंदुओं से बिन्दुवार नायब तहसीलदार कार्यालय में शिकायती पत्र भेजा था।
तीन वर्ष से तहसील में जमे हैं नायब तहसीलदार
नियमानुसार तीन वर्ष पूरा होने के बाद नायब तहसीलदार का स्थानांतरण हो जाता है। चर्चित नायब तहसीलदार समयावधि पूरा होने के बाद भी जमे हुए हैं। तहसील परिसर के कार्यालय में करीब दो दर्जन से अधिक प्राइवेट कर्मचारी काम कर रहे हैं। इसको लेकर तहसील के अधिवक्ता कई बार आवाज उठा चुके हैं। अंदर खाने की माने तहसील के भ्रष्टाचार में सारा लेन-देन का खेल इन्हीं के माध्यम से होता है।
एंटी करप्शन की टीम आई थी। प्राइवेट कर्मचारी को पकड़कर पूछताछ के बाद छोड़ दिया।
-चंद्रशेखर वर्मा, तहसीलदार रुद्रपुर |
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