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संवाद सूत्र, सिकंदरा (जमुई)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर धीरे-धीरे सियासी हलचल बढ़ती जा रही है तो चुनावी तिकड़म के बीच जन सुराज का दायरा भी तेजी बढ़ता नजर आ रहा है। बात एनडीए से नाराज नेताओं से जुड़ी है। इसके लिए जन सुराज सेफ हाउस बनता जा रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
ताजा उदाहरण सिकंदरा विधानसभा में देखने को मिल रही है। बुधवार को सिकंदरा विधानसभा से लोजपा (रा) के नेता सुभाषचंद्र बोस उर्फ सुभाष पासवान को जन सुराज ने पार्टी का सिंबल दे दिया है। जन सुराज से सिंबल मिलने के बाद सुभाष पासवान के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।
समर्थकों का कहना है कि जनता इस बार मूड बना चुकी थी कि सुभाष पासवान चुनावी मैदान में अवश्य आएं, लेकिन सियासी खींचतान के बीच दावेदारी नहीं मिलने पर एनडीए से नाराज होकर जन सुराज का दामन थामा है।
ज्ञात हो कि सुभाष पासवान वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में लोजपा से प्रत्याशी रहे और रामेश्वर पासवान से 12 हजार के अंतर हारकर दूसरे स्थान पर रहे। वहीं, वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में पुनः लोजपा से प्रत्याशी रहे। अपने निकटतम प्रतिद्वंदी रहे कांग्रेस के प्रत्याशी सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी से महज सात हजार मतों के अंतर से हार का सामना किया।
इसी तरह तीसरी बार वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में लोजपा ने इन्हें बेटिकट कर दिया था। फिर ये निर्दलीय चुनावी मैदान में कूद पड़े। हालांकि, वर्ष 2020 के चुनाव में भी 18 हजार मत लाकर तीसरे स्थान पर काबिज रहे।
लगातार 20 वर्षों का राजनीतिक अनुभव प्राप्त किए सुभाष पासवान चौथी बार अपने जोर आजमाइश के लिए चुनावी मैदान में कूद चुके हैं। अब देखना होगा कि इस बार उनकी चुनावी नैया पार होती है या... |
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