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दिल्ली के 3000 बस मार्शल को सता रही दीवाली काली होने की चिंता, सीएम रेखा गुप्ता से लगाई गुहार

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发表于 2025-10-28 09:31:42 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

दिल्ली के 3000 बस मार्शल को सता रही दीवाली काली होने की चिंता, सीएम रेखा गुप्ता से लगाई गुहार।  



राज्य ब्यूराे, नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) में बस मार्शल के तौर पर सेवाएं दे रहे लगभग 3 000 होमगार्ड काे दीवाली काली होने की चिंता सता रही है। दरअसल इन लोगों का पिछले जून से अभी तक वेतन नहीं आया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

परेशान ये लोग डीटीसी से लेकर परिवहन विभाग और अपने होमगार्ड मुख्यालय तक के चक्कर लगा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि कम से कम दीवाली पर ही वेतन दे दिया जाए, जिससे कि ये ठीक से अपनी दीवाली मना सकें।

इन लोगों ने परिवहन मंत्री डाॅ. पंकज सिंह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से गुहार लगाई है कि उन्हें उनका वेतन दिलवाया जाए कि जिससे वे भी परिवार के साथ दीवाली मना सकें। उधर, पिता की मौत के बाद स्कूल में पढ़ रही बेटी ने डीटीसी और होमगार्ड मुख्यालय को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि बकाया वेतन दिलवा दिया जाए कि जिससे उनकी कुछ मदद हो सके।

यात्रियों की सुरक्षा खासकर महिला सुरक्षा के लिए डीटीसी की बसों में इन 5200 होमगार्ड को बस मार्शल के तौर पर 2019 से लगाया गया है। इनमें से 3000 अभी भी डीटीसी में सेवाएं दे रहे हैं। इन्हें पिछले जून से वेतन नहीं मिला है। सूत्रों की मानें तो इन लाेगों के वेतन के लिए एक लंबी प्रक्रिया है।

बताया जा रहा है कि इन लोगों का वेतन निर्भया फंड से दिया जा रहा है। इन लोगों के वेतन की फाइल डीटीसी से चलती है जाे परिवहन विभाग के माध्यम से होम गार्ड मुख्यालय तक जाती है। तब हाेम गार्ड मुख्यालय वेतन जारी करता है।

इस लंबी प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे अधिकारियों की टेबल से भी यह फाइल गुजरती है जो बगैर इन लाेगों की परेशानी समझे फाइल को रोक कर बैठ जाते हैं, कई बार छोटी छोटी कमियों पर फाइल वापस डीटीसी भेज दी जाती है।

उसके वहां तक पहुंचने में ही समय लग जाता है जहां से फाइल वापस भेजी गई थी। ऐसे बाबुओं के कारण भी इन होमगार्ड को वेतन समय पर नहीं मिल पा रहा है। से होम गार्ड चाहते हैं कि उन्हें अन्य किसी विभाग में स्थानांतरित कर दिया जाए।

दरअसल होम गार्ड के मैनुअल में कहा गया है कि अगर तीन माह तक वेतन नहीं दिया जाता है तो इनकी सेवाएं अन्य विभाग में बदली जा सकती हैं। होम गार्ड मैनुअल में इन्हें लगाए जाने के समय तीन माह का एडवांस वेतन भी संबंधित विभाग से जमा करा लिए जाने का प्रविधान है। मगर इसका पालन नहीं हो रहा है।
आर्थिक तंगी से इलाज न करा पाने से मौत का आरोप

गत पांच अक्टूबर को होमगार्ड नरेश कुमार का निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वह अार्थिक तंगी से जूझ रहे थे और उनके पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वह अपना इलाज ठीक से करा पाते। अब उनके परिवार में कोई कमाने वाला भी नहीं बचा है।

स्कूल में पढ़ रही बेटी ने डीटीसी और होमगार्ड मुख्यालय को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि पापा का बकाया वेतन दिलवा दिया जाए कि जिससे उनकी कुछ मदद हो सके। बेटी के पत्र के बाद डीटीसी और होमगार्ड मुख्यालय ने तो अभी तक कोई मदद नहीं की है यहां तक कि उनका बकाया वेतन भी जारी नहीं हो सका है। बेटी ने पापा की जगह मां को होमगार्ड की नौकरी देने की भी मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है।  

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