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मतदाता कटने के बावजूद NDA आगे... SIR वाली सीटों पर दिलचस्प पैटर्न उभरा

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论坛元老

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发表于 2025-11-26 23:54:36 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

मतदाता कटने के बावजूद NDA आगे



डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में एक दिलचस्प पैटर्न उभरकर सामने आया है। चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान जिन सीटों पर सबसे ज़्यादा और सबसे कम वोटर-डिलीशन हुआ, उन 5 में से 4 सीटों पर NDA की जीत हुई है। यह ट्रेंड विपक्ष की उन आशंकाओं को और मजबूत करता है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर डिलीशन ने चुनावी परिणामों को प्रभावित किया हो सकता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
डेटा क्या कहता है?

चुनाव आयोग के अनुसार, SIR के दौरान कुछ सीटों पर वोटर सूची में असामान्य स्तर पर नाम हटाए गए।

Gopalganj में 56,793 नाम हटाए गए, और यहां BJP ने जीत हासिल की।

Purnia (50,767 डिलीशन) और Motihari (49,747 डिलीशन), दोनों ही जगह NDA (BJP) विजयी रहा।

यही पैटर्न उन सीटों में भी दिखा जहां डिलीशन बहुत कम था, Darbhanga (2,859 हटाए गए) और Bettiah (6,076 हटाए गए), दोनों सीटें BJP के खाते में गईं।

वहीं Dehri और Mahua में LJP (Ram Vilas) को जीत मिली। अर्थात, चाहे डिलीशन की मात्रा अधिक हो या कम, इन दो विपरीत स्थितियों में भी NDA को बढ़त मिलती दिखी।
विपक्ष के आरोप फिर तेज

यह डेटा विपक्ष की उन शिकायतों को हवा देता है जिसमें SIR को लेकर कई सवाल उठाए गए थे।

कांग्रेस की केरल इकाई ने तो दावा किया था कि NDA की 128 सीटों की जीत SIR डिलीशन से प्रभावित हो सकती है।

कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि डिलीशन ने कुछ सामाजिक समूहों को असमान रूप से बाहर किया, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन प्रभावित हुआ।
NDA का तर्क और राजनीतिक संदेश

NDA इस आंकड़े को अपने संगठनात्मक कौशल, बूथ-मैनेजमेंट और चुनावी तैयारी का परिणाम बता सकती है। उनके लिए यह “ग्राउंड कनेक्ट” की सफलता का प्रमाण है।

लेकिन विपक्ष के लिए यह मुद्दा सिर्फ हार-जीत से आगे जाकर चुनावी पारदर्शिता, समानता और वोटर अधिकारों की बहस को गहरा करता है।
बड़ा सवाल: क्या SIR सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया है?

यह पैटर्न संकेत देता है कि SIR जैसे ड्राइव किसी चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
सीमित समय में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और उसके बाद उन्हीं सीटों पर NDA की लगातार जीत—इस पूरे समीकरण को राजनीतिक और लोकतांत्रिक दोनों स्तरों पर गंभीर बहस का विषय बनाते हैं।

NDA की 4-में-5 बढ़त यह दिखाती है कि चुनाव सिर्फ चुनावी अभियान का नहीं, बल्कि मतदाता सूची की संरचना का भी खेल बनता जा रहा है। आगे तय है कि SIR और डिलीशन का मुद्दा चुनाव आयोग से लेकर विपक्ष की रणनीति तक—मुख्य विमर्श में बना रहेगा।
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