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Uttarakhand News: 16 करोड़ से दुरुस्त होगा नंदा की चौकी पुल, टेंडर आमंत्रित; जल्द होगा यातायात बहाल

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发表于 2025-11-26 23:45:36 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

नंदा की चौकी के पास टूटा पुल। जागरण आर्काइव



सुमन सेमवाल, देहरादून। नंदा की चौकी क्षेत्र में पांवटा साहिब राजमार्ग का पुल 15 सितंबर की मध्य रात्रि को हुई अतिवृष्टि में क्षतिग्रस्त हो गया था। अतिवृष्टि से टौंस नदी उफान पर थी और पुल की पांवटा साहिब के छोर वाली एबटमेंट वाल ढह गई थी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

तब से पांवटा राजमार्ग पर वाहनों का संचालन नदी पर ह्यूम पाइप से अस्थाई पुलिया बनाकर किया जा रहा है। हालांकि, अब राहत की बात यह है कि क्षतिग्रस्त पुल को दुरुस्त करने की डीपीआर को मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही सुदृढ़ीकरण कार्य के लिए टेंडर भी आमंत्रित कर लिए गए हैं।

लोनिवि अधिकारियों के अनुसार डीपीआर में पुल को दुरुस्त करने की लागत करीब 16 करोड़ रुपए तय की गई है। इसी के मुताबिक टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।
यह पुल वर्ष 1992 में बना था और उस समय जो गलती की गई थी, उसे डीपीआर में सुधार लिया गया है। लोनिवि के परीक्षण में चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि पानी ने किनारे वाली वाल को ध्वस्त किया, जबकि बीच के पिलर जस के तस खड़े रहे।

पता चला कि न सिर्फ क्षतिग्रस्त एबटमेंट वाल ओपन फाउंडेशन वाली है, बल्कि देहरादून के छोर वाली वाल की भी यही प्रकृति है। सिर्फ बीच के पिलर वेल फाउंडेशन वाले पाए गए। यही कारण रहा कि नदी के वेग में बने पुल के बीच के पिलर महफूज खड़े रहे, जबकि किनारे की एबटमेंट वाल क्षतिग्रस्त हो गई।

लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिकारियों के अनुसार पुल की मरम्मत के डिजाइन में ओपन फाउंडेशन की जगह वेल फाउंडेशन का प्राविधान किया गया है। इसकी गहराई 20 मीटर से अधिक है, जबकि ओपन फाउंडेशन की गहराई महज 05 मीटर के आसपास होती है। एबटमेंट वाल के निर्माण के साथ ही परियोजना में सुरक्षा के कुछ अन्य प्राविधानभी जोड़े गए हैं। अधिकारियों के अनुसार दो से तीन माह में पुल तैयार कर यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।

वेल और ओपन फाउंडेशन में अंतर
वेल फाउंडेशन ह एक गहरे नींव (डीप फाउंडेशन) का प्रकार है, जिसमें एक बड़ा खोखला बेलनाकार ढांचा (वेल या कैसन) जमीन में डुबोया जाता है। वहीं, ओपन फाउंडेशन एक उथला नींव का प्रकार है, जिसे जमीन की सतह के पास बनाया जाता है। इसमें खुदाई कर सीधे ठोस कंक्रीट का आधार डाला जाता है।

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नदियों के लिए वेल फाउंडेशन ही उपयुक्त
विशेषज्ञों के अनुसार वेल फाउंडेशन नदियों, झीलों या जलमग्न क्षेत्रों में, जहां पुल के पिलर पानी के अंदर खड़े किए जाते हैं। वहीं, ओपन फाउंडेशन ठोस जमीन, पहाड़ी या शुष्क क्षेत्रों में तैयार की जाती है।

बड़ा सवाल: राजमार्ग के पुल में क्यों नहीं दिखी दूरगामी सोच
राजमार्गों यह प्रमुख सड़कों में पुलों आदि का निर्माण कम से कम 50 साल की अवधि के लिए किया जाता है। उसी के अनुसार परियोजना को डिजाइन किया जाता है। लेकिन, नंदा की चौकी में वर्ष 1992 में बने पुल में यह दूरगामी सोच नहीं दिखी। संभव है कि निर्माण अवधि के दौरान नदी शुष्क रही हो। जैसा यह नदी ज्यादातर समय रहती है। लेकिन, पुलों का निर्माण वर्षा/डिस्चार्ज के कम से कम 100 साल के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। इस समय भी मानसून सीजन में देहरादून में वर्षा ने 100 साल के रिकार्ड को तोड़ा है। यदि उस समय भी 100 साल के आंकड़े लिए जाते तो एबटमेंट वाल का निर्माण वेल फाउंडेशन पर ही किया जाता। जैसे इसी पुल पर बीच के पिलर का निर्माण किया गया था।

आज रात से शुरू हो गया टाइल्स बिछाने का कार्य
वर्तमान में पांवटा साहिब राजमार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए ह्यूम पाइप के माध्यम से जो अस्थाई पुलिया बनाई गई है, उसके एप्रोच मार्ग की दशा बेहद खराब है। अब गड्ढों से भरे एप्रोच मार्ग को बेहतर बनाने के लिए सोमवार देर रात से यहां टाइल्स बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। ताकि मुख्य पुल के तैयार होने तक वाहनों को गुजरने में परेशानी का सामना न करना पड़े।
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