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जालंधर में पुलिस की मुस्तैदी में चलती हैं RSS की शाखाएं, फिरोजपुर घटना के बाद उठी सुरक्षा बढ़ाने की मांग

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论坛元老

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发表于 2025-11-26 23:45:32 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

पुलिस की मुस्तैदी में सुबह चलती हैं आरएसएस की शाखाएं, शाम को सुरक्षा देने की मांग।



संवाद सहयोगी, जालंधर। फिरोजपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेता के बेटे को गोली मारने की घटना के बाद पूरे पंजाब में आरएसएस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को शहर में लगने वाली आरएसएस की शाखाओं की पड़ताल की गई तो पता चला कि जालंधर जिले में पुलिस सुरक्षा के बीच रोजाना 45 शाखाएं लगती हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

रोजाना सुबह लगने वाली आरएसएस की हर शाखा की सुरक्षा के लिए दो पुलिस मुलाजिम जूलो गाड़ी में मुस्तैद रहते हैं और एक ड्यूटी अफसर रोजाना चेकिंग के लिए भी जाता है। स्वयंसेवकों को बिना चेकिंग से अंदर जाने दिया जाता है, पर दूसरे आने-जाने वालों की जांच करके ही प्रवेश करने दिया जाता है।

फिरोजपुर में आरएसएस के वरिष्ठ नेता बलदेव अरोड़ा के बेटे नवीन अरोड़ा को गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद हर किसी ने सरकार के खिलाफ रोष जाहिर किया था और इस घटना के बाद पूरे पंजाब में आरएसएस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

शहर में आरएसएस का मुख्य कार्यालय पीली कोठी है और वहीं से आरएसएस की सारी गतिविधियां चलती हैं। सबसे ज्यादा सुरक्षा वहीं पर है। दफ्तर में पंजाब पुलिस की पूरी घेराबंदी की गई है और वहां पर किसी बाहरी व्यक्ति को बिना इजाजत जाने की अनुमति नहीं है।

कड़े सुरक्षा पहरे में वहां पर कार्यक्रम होते हैं। इसके अलावा शहर भर में 45 शाखाएं रोजाना सुबह लगती हैं, जिनमें एसबीटी स्कूल थापरा बगीची, सेठ हुक्म चंद कालोनी, फ्रेंड्स कालोनी, प्रताप बाग, बाबा बालक नाथ मंदिर किशनपुरा के अलावा शहर में कई जगहों पर शाखाएं लगती हैं।

आरएसएस का महानगर संघ संचालक विजय गुलाटी ने बताया कि दिन के समय पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए होते हैं, लेकिन फिरोजपुर में हुई घटना को देखते हुए वह शाम को होने वाली बच्चों की शाखाओं में सुरक्षा होनी चाहिए। इस बारे में पुलिस कमिश्नर को लिखेंगे कि शाम के समय भी सुरक्षा मुहैया करवाई जाए।
2016 में आरएसएस नेता जगदीश गगनेजा की गोलियां मार की गई थी हत्या

छह अगस्त 2016 की शाम आरएसएस के वरिष्ठ नेता व पंजाब के सह संघचालक रहे ब्रिगेडियर (रि.) जगदीश गगनेजा को दो बाइक सवार हमलावरों ने भगवान वाल्मीकि चौक (ज्योति चौक) में गोलियां मार दी थी। शरीर पर तीन गोलियां लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे और करीब 47 दिनों तक अस्पताल में इलाज के बाद उनकी मौत हो गई थी।

लंबी जांच के बाद एनआइए ने नवंबर 2019 में इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिनमें हरदीप सिंह उर्फ शेरा, रामनदीप सिंह उर्फ बग्गा, जगतार सिंह उर्फ जग्गी जोहल, अनिल कुमार उर्फ काला, धरमिंदर सिंह उर्फ गुगुनी सहित कई नाम शामिल थे। एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि यह हत्या किसी व्यक्तिगत रंजिश का नहीं, बल्कि खालिस्तानी नेटवर्क की तरफ से की गई टारगेट किलिंग थी।

जांच में सामने आया था कि इस पूरे नेटवर्क को ब्रिटेन, इटली, आस्ट्रेलिया, यूएई सहित कई देशों से फंडिंग मिली थी। हथियारों की सप्लाई में तिहाड़ जेल में बंद मुकेश और उससे जुड़े गिरोह का नाम भी सामने आया था। 2022 में उसके दो साथियों को पिस्टल और कारतूस सहित पकड़ा गया था।
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