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विदेशी इतिहासकारों की शरारत को पीछे छोड़, गौरव के पन्ने सहेज रहीं लोक कलाएं- सीएम योगी

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发表于 2025-11-26 23:40:24 | 显示全部楼层 |阅读模式
  



जागरण संवादददाता, लखनऊ। उत्तराखंड महोत्सव का आयोजन एक ओर अवध के श्रीराम तो दूसरी ओर उत्तराखंड के बद्री विशाल व चारों धाम की संयुक्त शक्ति का प्रतीक है। संकट के दौरान यही लोकगीत कला व इतिहास को संरक्षित करते हैं। देश के कई गौरवशाली क्षण हैं, जिसे विदेशी इतिहासकारों ने शरारतन भारत के गौरवशाली इतिहास के साथ नहीं जोड़ा। ऐसे में भारत के गौरव व गरिमा से जुड़े हुए पन्नों को सहेजने का काम लोकगायन व परंपरा के माध्यम से हमें सुनने-देखने को प्राप्त होते है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मां गंगा, यमुना, सरयू व शारदा जैसी नदियां देवभूमि से होकर उत्तर प्रदेश की भूमि को सोना उगलने वाली धरती के रूप में परिवर्तित करती हैं। बीरबल साहनी मार्ग पर चल रहे उत्तराखंड महोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को मुख्य अतिथि थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपनी जवानी लगाने वाले नौजवान और अमृत तुल्य जल देने वाली पवित्र नदियां उत्तराखंड से ही हैं।

वास्तव में यह महोत्सव हमारी लोककला व संस्कृति को जीवंत बनाने का एक माध्यम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपनी लोक संस्कृति को लेकर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए और उसे संरक्षित करते हुए एक मंच भी देना चाहिए और यही एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भाव है। हम सबका सौभाग्य है कि आज का उत्तराखंड नौ नवंबर 2000 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कारण बना।
सीडीएस जनरल विपिन रावत उत्तराखंड की पावन भूमि की देन

देश की रक्षा सेनाओं की एकीकृत विंग के कमांडर इन चीफ के रूप में देश के पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत उत्तराखंड की पावन भूमि की देन हैं। द्वितीय सीडीएस भी उत्तराखंड की देन हैं। हमने भक्ति और शक्ति का समन्वय उसी प्रकार से किया है, जिस प्रकार राजस्थान की धरती ने करके दिखाया है। केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज हम सब लोग लखनऊ की धरती पर हैं और यूनेस्को ने वर्ल्ड क्रिएटिव सिटी की लिस्ट में भोजन की उत्कृष्ट परंपरा का निर्वहन करने के लिए इसे विश्व की धरोहर के रूप में समावेशित किया है।

आयोजन में पूर्व मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक ओपी श्रीवास्तव, उत्तराखंड महापरिषद के अध्यक्ष हरिश्चंद्र पंत, पर्वतीय महापरिषद के अध्यक्ष गणेश जोशी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी देखे। रविवार के चलते महोत्सव में भीड़ रही। 18 को महोत्सव का समापन होगा।
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