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दिल्ली ब्लास्ट में मिलिट्री ग्रेड विस्फोटक के इस्तेमाल की आशंका, पढ़ें कितना खतरनाक होता है PETN

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发表于 2025-11-26 23:15:45 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

दिल्ली ब्लास्ट में सैन्य-ग्रेड विस्फोटकों के इस्तेमाल की आशंका  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट मामेल में जांच लगातार जारी है। इस विस्फोट में किस तरह के विस्फोटक या रसायन का इस्तेमाल किया गया था, यह अभी भी साफ नहीं हो पाया है। फोरेंसिक और एनएसजी की विस्फोटक ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। हालांकि, नुकसान और हताहतों की संख्या के हिसाब से अनुमान लगाया जा रहा है कि इस ब्लास्ट के दौरान सैन्य-ग्रेड विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया होगा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को जांचकर्ताओं ने फोरेंसिक विभाग से इस बारे में राय मांगी कि क्या पीईटीएन, सेमटेक्स या आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया होगा। शुरुआती जांच में अमोनियम नाइट्रेट ईंधन तेल और डेटोनेटर के इस्तेमाल की संभावना जताई जा रही है। क्योंकि नाइट्रेट तेल का इस्तेमाल औद्योगिक और तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों (आईईडी) में आसानी से उपलब्ध होने और किफायती होने के कारण किया जाता है।

फारेंसिक विभाग की टीम द्वारा घटनास्थल से करीब 42 साक्ष्य इकठ्ठा किए गए हैं और उनका प्रयोगशाला परीक्षण गया है। फोरेंसिक टीमों द्वारा एकत्रित किए गए साक्ष्यों में i20 कार के टायर, चेसिस, CGC सिलेंडर और बोनट के कुछ हिस्से, साथ ही घटनास्थल पर मिले अन्य अवशेष और पाउडर के अंश शामिल हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई उच्च-जोखिम वाली सामग्रियों के बारे में पता लगाने में आसानी होगी।
कितना खतरनाक होता है PETN?

पेंटाएरिथ्रिटोल टेट्रानाइट्रेट, या PETN, सेमटेक्स का एक प्रमुख घटक है, जो नाइट्रोग्लिसरीन के समान रासायनिक परिवार से संबंधित है। यह बहुत शक्तिशाली विस्फोटकों में से एक है। इसके रंगहीन क्रिस्टल का पता लगाना मुश्किल होता है। अन्य रसायनों की तुलना में विस्फोट करने के लिए इस विस्फोटक की बहुत कम मात्रा की जरुरत होती है। यही वजह है कि आतंकवादी इसका अधिक प्रयोग करते हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि पीईटीएन काफी स्थिर है और गर्मी या शॉक वेव से इसका विस्फोट हो सकता है। एक कार लगभग 100 ग्राम में नष्ट हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि न तो पीईटीएन और न ही सेमटेक्स को विस्फोटक के रूप में कार्य करने के लिए स्वाभाविक रूप से छर्रों की आवश्यकता होती है और यह पदार्थ ही विस्फोट के माध्यम से भारी क्षति पहुंचाने के लिए पर्याप्त है।
उचित विस्फोट प्रणाली का इस्तेमाल

यही नहीं अमोनियम नाइट्रेट ईंधन तेल सबसोनिक दहन के बजाय सुपरसोनिक शॉक वेव उत्पन्न करता है, जिसका अर्थ है कि ऊर्जा अत्यंत उच्च दर पर मुक्त होती है, जिससे शक्तिशाली शॉक प्रभाव उत्पन्न होता है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि कार को उड़ाने के लिए एक उचित विस्फोट प्रणाली का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें उच्च-स्तरीय विस्फोटक लगे थे। सर्किट बनाने और बम को ट्रिगर करने के लिए एक घड़ी और उसकी छोटी बटन वाली बैटरियों का इस्तेमाल किया गया होगा।

बता दें कि 2011 में दिल्ली उच्च न्यायालय में हुए विस्फोट में, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड सहित फोरेंसिक विशेषज्ञों की प्रारंभिक राय थी कि इसमें अमोनियम नाइट्रेट और PETN का मिश्रण इस्तेमाल किया गया था। लेकिन बाद में गृह मंत्रालय ने बताया था कि इसमें RDX का इस्तेमाल हुआ था। हालांकि लाल किले के पास हुए इस विस्फोट में किस चीज का इस्तेमाल किया गया है, जांच पूरी होने के बाद ही क्लियर हो पाएगा।

यह भी पढ़ें- दिल्ली विस्फोट में इस्तेमाल i-20 कार सबसे पहले कनॉट प्लेस और मयूर विहार में आई थी नजर, जांच में बड़ा खुलासा
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