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टेलीग्राम से चीनी नागरिकों को बैंक खाते बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 170 करोड़ का लेनदेन आया सामने

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发表于 2025-11-26 23:09:10 | 显示全部楼层 |阅读模式
  



जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। बाहरी दिल्ली जिला पुलिस ने डिजिटल धोखाधड़ी के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह जाली केवाईसी का इस्तेमाल करके टेलीग्राम व अन्य एन्क्रिप्टेड चैनलों के माध्यम से भारतीय बैंक खातों को चीनी नागरिकों को बेचता था। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत चार लोगों को रोहिणी से गिरफ्तार किया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गिरोह से धोखाधड़ी में इस्तेमाल की गई ई-डिवाइस, सिम कार्ड, खाता पासबुक/चेकबुक और अन्य दस्तावेज का जखीरा बरामद किया है। यह गिरोह दो प्रतिशत कमीशन लेकर काम करता था और क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान प्राप्त करता था। पुलिस का कहना है कि गिरोह ने पिछले 4-5 महीनों में देशभर में अनुमानित 170 करोड़ के फर्जी लेनदेन को अंजाम दिया। देश के विभिन्न हिस्सों से धोखाधड़ी की ऐसी 146 शिकायतें सामने आई हैं, जिनका का संबंध गिरोह की ओर से बेचे गए बैंक खातों से है।

जिला पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने बताया कि 27 अगस्त को बाहरी जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत प्राप्त हुई, जिसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि इंटरनेट मीडिया पर निवेश पर ज्यादा रिटर्न का लालच देकर उसके साथ 20.16 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई है। शिकायतकर्ता ने कई बैंक खातों में यह पैसा ट्रांसफर किया।

जांच के दौरान पुलिस ने लाभार्थी खातों के मुख विवरणों का विश्लेषण किया, इसके बाद इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकार्ड (आईपीडीआर), काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) की जांच और धोखाधड़ी से जुड़े मोबाइल नंबरों के लिए आइएमइआइ के आधार कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे। एक मोबाइल से रोहिणी सेक्टर-11 का पता मिला।

टीम को पता चला कि इसी इलाके से खाता बेचने में शामिल एक संदिग्ध गिरोह संचालित हो रहा था। पुलिस ने रोहिणी सेक्टर-11 में छापेमारी की। चार लोगों को गिरफ्तार किया, इनकी पहचान सौरभ गुप्ता, इंद्र कुमार, मोहित कुमार व बिशाल श्रेष्ठ के रूप में हुई।

उन्होंने बताया कि रोहिणी निवासी सौरभ गुप्ता गिरोह का मास्टरमाइंड है, वह पिछले पांच महीनों से अकाउंट सेलिंग सिंडिकेट चला रहा था। 12 वीं पास इंद्र कुमार और 10 वीं फेल बिशाल श्रेष्ठ रोहिणी में रहते हैं। जबकि मोहित सुल्तानपुरी का रहने वाला है।

पुलिस उपायुक्त ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपित सौरभ गुप्ता पिछले कई महीनों से इंद्र कुमार, विशाल श्रेष्ठ और मोहित कुमार के साथ मिलकर खाता विक्रेताओं का फर्जी सिंडिकेट चला रहा था। उन्होंने अलग-अलग आधिकारिक पतों पर पंजीकृत कई व्यक्तियों के चालू बैंक खाते हासिल किए और बाद में मैसेजिंग प्लेटफार्म टेलीग्राम के माध्यम से इन खातों को चीनी नागरिकों को बेच दिया।
इलेक्ट्राॅनिक और वित्तीय वस्तुओं का जखीरा मिला

पुलिस ने आरोपी से 36 स्मार्ट मोबाइल फोन, 26 कीपैड मोबाइल फोन, 43 सिम, आठ लैपटाप, तीन प्रिंटर, दो फाइ-फाइ कैमरे, 16 एटीएम, 41 चेकबुक व पासबुक, नौ पेन कार्ड, छह आधार कार्ड, तीन मतदाता पहचान पत्र, एक राउटर, एक पेन ड्राइव आदि सामग्री बरामद की है।

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