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Gopalganj News: फाइलों में अटकी सबेया एयरपोर्ट के निर्माण की योजना, हवा-हवाई साबित हुई सरकार की घोषणा

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发表于 2025-10-28 10:10:35 | 显示全部楼层 |阅读模式
  
फाइलों में अटकी सबेया एयरपोर्ट के निर्माण की योजना






मिथिलेश तिवारी, गोपालगंज। सबेया एयरपोर्ट के निर्माण की योजना संचिकाओं में फंसी नजर आ रही है। इस एयरपोर्ट के विस्तार की योजना लंबे समय से धरातल पर नहीं उतर सकी है। यह स्थिति तब है जबकि केंद्र की उड़ान योजना में इसे शामिल किया गया है। इसके तहत छोटे-छोटे शहरों से भी लोगों को हवाई सेवा देने का उद्देश्य शामिल है। योजना धरातल पर नहीं उतरने का यह मुद्दा इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हथुआ प्रखंड में स्थित सबेया एयरपोर्ट का निर्माण 1868 में अंग्रेजों ने कराया था। तब चीन के नजदीक होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से यह एयरपोर्ट काफी अहम था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश आर्मी ने सबेया एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया। आजादी के बाद भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इस हवाई अड्डे को ओवरटेक कर लिया।

ओवरटेक किए जाने के बाद रक्षा मंत्रालय के स्तर पर इसे विकसित करने की कवायद नहीं की गई। तब से यह एयरपोर्ट उपेक्षित पड़ा हुआ है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय इस एयरपोर्ट को लेकर कुछ समय तक सुगबुगाहट दिखी।

तब एयरपोर्ट के रनवे को दुरुस्त कराया गया तथा कुछ विमान भी यहां उतरे। समय के साथ रक्षा मंत्रालय ने इस एयरपोर्ट को उसकी हालत पर छोड़ दिया।
एयरपोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण का पेच

करीब पांच सौ एकड़ क्षेत्र में फैले इस सबेया एयरपोर्ट की ओर से रक्षा मंत्रालय की नजर हटने का नतीजा यह रहा कि एयरपोर्ट की जमीन पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा हो गया। उड़ान योजना के इस एयरपोर्ट के शामिल होने के बाद अतिक्रमण हटाने की कवायद प्रारंभ की गई।

तब आधिकारिक तौर पर कुल 1011 लोगों को अतिक्रमणकारी के रूप में चिह्नित किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार सबेया हवाई अड्डा की 338 एकड़ जमीन पर 1011 लोगों ने अतिक्रमण किया है।

इसके बाद संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया। रक्षा संपदा अधिकारी (डीईओ) दानापुर की ओर से अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी होने के बाद फिर अतिक्रमण हटाने का मामला सुस्ती में पड़ गया है।
उड़ान योजना में शामिल होने के बाद जगी थी विकास की उम्मीद

सबेया एयरपोर्ट को उड़ान योजना में शामिल करने के बाद गोपालगंज और उसके आस-पास के जिलों के लोगों के बीच उम्मीद की नई किरण जगी थी। दरअसल इस इलाके के करीब डेढ़ लाख लोग खाड़ी देशों में रहते हैं।

ऐसे में अगर एयरपोर्ट शुरू हो जाता है तो इससे लोगों को काफी सहूलियत होगी, साथ ही इलाके में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही जिले के पर्यटन को भी एक नई उड़ान मिल सकेगी।
2016 में प्रारंभ की गई थी उड़ान योजना

2016 में केंद्र सरकार ने देश के छोटे-छोटे शहरों में भी हवाई सेवा देने के उद्देश्य से उड़ान योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत बिहार के आरा, बेगूसराय, बेतिया, कैमूर, भागलपुर, बिहारशरीफ, बिहटा, वीरपुर, बक्सर, छपरा, डेहरी आनसोन, फारबिसगंज, हथुआ (गोपालगंज), जहानाबाद, जोगबनी, कटिहार, किशनगंज, मधुबनी, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नरिया, पंचनपुर, रक्सौल, सहरसा और वाल्मीकिनगर को भी रखा गया। इस योजना में हथुआ के सबेया एयरपोर्ट के शामिल होने के बाद भी एयरपोर्ट का कायाकल्प करने की योजना अटकी हुई है।
सीमांकन से आगे नहीं बढ़ी बात

पिछले पांच-छह वर्ष में सबेया में एयरपोर्ट निर्माण की योजना जमीन के सीमांकन तक ही सिमटा हुआ है। करीब दो साल पूर्व इसके सीमांकन का कार्य प्रारंभ किया गया। अब तक बात सीमांकन में ही फंसी है। अधिकारी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि सीमांकन से आगे का काम कब होगा।
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