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जम्मू की शान श्री रणबीर माडल हायर सेकेंडरी स्कूल का है गौरवशाली इतिहास, जानें कौन से नायाब हीरे दिए हैं इस स्कूल ने

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发表于 2025-10-28 10:09:20 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

आज भी, यह शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।



सुरेंद्र सिंह, जम्मू। जिस समय देश गुलामी की जंजीरों से खुद को मुक्त करवाने के लिए संघर्ष कर रहा था, उस समय जम्मू कश्मीर के डोगरा शासक महाराजा रणबीर सिंह जम्मू ने डुग्गर प्रदेश के बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए एक स्कूल की नींव रखी, जिसे अब श्री रणबीर माडल हायर सेकेंडरी स्कूल के नाम से दुनिया जाती है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

सन 1872 में इस स्कूल की नींव महाराजा रणबीर सिंह ने रखी थी और अब वर्ष 2025 तक पहुंचते हुए इस स्कूल ने देश को कई नायाब हीरे सौंप दिए हैं, जिनमें भारतीय सिनेमा के पहले सुपर स्टार केएल सहगल से लेकर देश के 20वें सेनाध्यक्ष जनरल निर्मल चंद्र विज भी शामिल हैं।

इतना ही नही इस स्कूल के पिटारे से कई ऐसी शख्सियत भी निकली हैं, जिन्होंने संगीत व साहित्य के क्षेत्र में अपना मुकाम हासिल किया है, जिनमें संतुर वाधक पंडित शिव कुमार शर्मा, डोगरी के प्रख्यात लेखक पदमश्री प्रो. रामनाथ शास्त्री और प्रमुख पत्रकार, लेखक, मानवाधिकार कार्यकर्ता और राजनीतिक टिप्पणीकार पदम भूषण बलराज पुरी भी शामिल हैं।

इनके अलावा भी इस स्कूल ने कितनी शख्सियतों को जन्म दिया है, जिन्हाेंने न सिर्फ जम्मू कश्मीर बल्कि पूरे भारत देश को गौरवांवित किया है।

  
स्कूल का इतिहास

जम्मू का एसआरएमएल स्कूल 1872 में महाराजा रणबीर सिंह द्वारा रणबीर पाठशाला के रूप में स्थापित किया गया था और महाराजा प्रताप सिंह द्वारा पूरा किया गया था। इसे 1905 में जम्मू कालेजिएट स्कूल और 1965 में गवर्नमेंट श्री रणबीर मल्टी-लेटरल हायर सेकेंडरी स्कूल के रूप में नामित किया गया था। बाद में यह वर्ष 2015 में गवर्नमेंट श्री रणबीर माडल हायर सेकेंडरी स्कूल बन गया। आज इसे एसआरएमएल माडल हायर सेकेंडरी स्कूल के रूप में जाना जाता है और एक विरासत संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है।
आधुनिक शिक्षा का गढ़ रहा हैं यह स्कूल

कहने तो यह सरकारी स्कूल है लेकिन यहां मिलने वाली शिक्षा बड़े से बड़े प्राइवेट स्कूल को भी मात दे रही है। इस स्कूल में नौवीं से लेकर बारहवीं कक्षा तक के बच्चे भी पढ़ते हैं और मार्डन किंडरगार्टन भी यहां चल रहा है, जिसमें शहर के कई घरों के बच्चे भी पढ़ने आते हैं। इस स्कूल में 45 स्मार्ट क्लास हैं और आधुनिक कंप्यूटर रूम भी हैं। इतना ही स्कूल में सत्तर से अधिक सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं जो सभी ठीक ठाक काम कर रहे हैं। इन कैमरों की निगरानी के लिए प्रिंसिपल कार्यालय के साथ एक कंट्र्रोल रूम भी बनाया गया है, जहां से स्कूल के प्रिंसिपल या अन्य प्रभारी शिक्षक दिन भर स्कूल में बच्चों व स्टाफ सदस्यों की गतिविधियों पर नजर रखता है। इस कंट्रोल रूम का ही असर है कि स्कूल के समय न तो कोई बच्चा आैर न ही कोई शिक्षक बाहर घूमता दिखाई देगा।
जम्मू की सबसे पुरानी व पहली लाइब्रेरी भी इसी स्कूल में

रणबीर हायर सेकेंडरी स्कूल में जम्मू की सबसे पहली व पुरानी लाइब्रेरी भी है जिसमें आज हजारों की संख्या में कई एतहासिक व पौराणिक पुस्तकें भी पढ़ने को मिलती हैं।इस लाइब्रेरी में आज आधुनिक व एतहासिक पुस्तकों का भंडार है जिसे स्कूल प्रबंधन ने बहुत ही तरीके से सहेज कर रखा है।अपने खाली समय में स्कूल के विद्यार्थी इस लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ते हैं।स्कूल के लेक्चरर सुदर्शन शर्मा ने बताया कि इस लाइब्रेरी में कई पुस्तकें ऐसी हैं, जो सिर्फ यही पर मिलेंगी।
नब्बे प्रतिशत से कम नहीं आता परिणाम

रणबीर हायर सेकेंडरी स्कूल का परीक्षा परिणाम बोर्ड परीक्षाओं में कभी नब्बे प्रतिशत से कम नहीं आता। बोर्ड की परीक्षाओं में कभी इस स्कूल की पोजीशन न आए, ऐसा कभी हो नहीं सकता। इस स्कूल के वर्ष 2023-24 में बारहवीं कक्षा में नौ विद्यार्थी टापर बने थे जबकि वर्ष 2022-23 में इस स्कूल के छह बच्चों ने दसवीं कक्षा में टाप किया था। वर्ष 2025 में भी इस स्कूल के बच्चों ने बोर्ड की परीक्षाओं में परचम लहराया था, जिनमें एक छात्र नवनीत सूदन को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गांधी दूत सम्मान से सम्मानित भी किया था। वर्ष 2020 में इस स्कूल के सात बच्चों ने बारहवीं में पोजीशन प्राप्त की थी।
इस स्कूल में पढ़ना ही गर्व की बात की थी


रणबीर हायर सेकेंडरी स्कूल में पढाई करना किसी के लिए भी गर्व की बात होती है। मैं इस स्कूल से वर्ष 1072 में पास आउट हुआ था।मुझे अब भी याद है कि उस समय स्कूल में प्रिंसिपल तेज राम खजूरिया हुआ करते थे जो बहुत ही अनुशासन प्रिय शिक्षक थे।वह जब अपने कमरे में बाहर आते थे, तो पूरे स्कूल में खामोशी पसर जाती थी। उस समय हालांकि आज की तरह सीसीटीवी कैमरों का चलन नहीं था लेकिन इसके बाद भी उन्होंने कमरों में माइक लगवाए थे और अगर किसी कमरे में बच्चों का शोर सुनाई देता तो माइक से आवाज सीधे उनके कमरे में लगे स्पीकर तक पहुंच जाती थी।तेज प्रताप खजूरिया खुद भी मैथ के शिक्षक थे और प्रिंसिपल होते भी है, वह खुद कक्षा लेते थे और बच्चों को पढ़ाते थे। मैं तो कहूंगा कि रणबीर स्कूल में बिताया समय मेरे जीवन का स्वर्णिम समय रहा है।इस स्कूल ने मेरे जीवन में बदलाव लाया। आज तक मेरे जीवन में जितना भी अनुशासन आया है, वह इसी स्कूल की देन है। - पूर्व छात्र राजेंद्र खजूरिया, सेवानिवृत लेक्चरर


  


आज अगर मैंने साहित्य क्षेत्र में किसी मुकाम को हासिल किया है तो उसके पीछे मेरे रणबीर स्कूल की ही हाथ है। इस स्कूल में मैं वर्ष 1953-54 में छठी कक्षा से पढ़ने आया था। उस समय स्कूल में राम लाल बडगोत्रा प्रिंसिपल थे जबकि तेज प्रताप खजूरिया वाइस प्रिंसिपल थे। स्कूल में उस समय भी इतना अनुशासन था कि बच्चा तो दूर कोई शिक्षक भी उसे तोड़ नहीं सकता था। उस जमाने में जम्मू के दो शिक्षक संस्थानों का पूरे देश में नाम था।एक तरफ जम्मू का प्रिंस आफ वेल्स कालेज था, जिसे आज जीजीएम साइंस कालेेज के नाम से जाना जाता है और दूसरा रणबीर हायर सेकेंडरी स्कूल। प्रिंस आफ वेल्स पूरे उत्तर भारत का सबसे बेहतरीन कालेज था जबकि रणबीर स्कूल जम्मू कश्मीर का बेहतरीन स्कूल था।मुझे आज भी अपने शिक्षकों के नाम याद हैं जिनमें विश्वनाथ खजूरिया भी एक थे। उन्होंने डोगरी नृत्य फुमनियां को स्कूल के बच्चों को लेकर दोबारा जीवंत किया और यह नृत्य तब दिल्ली में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में लगातार होता रहा था।वहां स्कूल के बच्चे ही डोगरा वाद्य यंत्र बजाते थे। मुझे लिखने के लिए शिक्षक दुर्गा दत्त शास्त्री ने प्रेरित किया। उनकी प्रेरणा से आज तक मैं सौ से अधिक पुस्तकों को लिख चुका हूं और कइयों का संपादन भी कर चुका है।इनके अलावा भी इस स्कूल में शिक्षक लक्ष्मी दत्त शास्त्री, शिव कुमार शर्मा आदि थे, जो नायाब हीरे थे। - पूर्व छात्र ओम गाेस्वामी, साहित्य अकादमी एवं कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों के विजेता
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