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पोखर का खुदाई करने से बना छठ के लिए खतरनाक घाट
संवाद सूत्र, गढ़पुरा (बेगूसराय)। प्रखंड मुख्यालय गढ़पुरा का छठ पूजा के लिए एक मात्र पंचो सिंह पोखर है। इस बार तालाब की मिट्टी उराही किए जाने से चारों तरफ का घाट खतरनाक बन गया है। जिसके कारण इस तालाब में छठ पर्व मनाने में कठिनाई होगी। ऐसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले पंचो सिंह पोखर का आज तक समुचित विकास नहीं हो पाया है। इस बार जिर्णोद्धार के नाम पर वर्षा से पहले तालाब का मिट्टी उराही जेसीबी से किया गया। जिसके कारण इस बार छठ पूजा के लिए खतरनाक घाट बन गया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
जबकि गढ़़पुरा गांव और बाजार के लोगों के लिए छठ पर्व मनाने के लिए एक मात्र पंचो सिंह पोखर ही है। जिसके संबंध में छठ पूजा समिति के अध्यक्ष लाल बाबू महतो एवं कार्यकर्ता मिलकर सीओ राजन कुमार को अवगत भी कराया है। जिसमें बातचीत के दौरान यह निष्कर्ष निकाला गया है कि गंदा पानी को निकाला जाएगा और जलभराव करने में पानी कमर भर डालने से यह गंभीर समस्या का बहुत हद तक निदान हो जाएगा।
वही छठ व्रतियों को तालाब में खड़े होने में परेशानी नहीं हो। इसके लिए सीढ़ी के आगे बांस बल्ला लगाने पर भी विचार किया गया है। मालूम हो कि इस तालाब का स्वतंत्रता आंदोलन के नमक सत्याग्रह अवज्ञा आंदोलन से बहुत बड़ा जुड़ाव रहा है। ऐसे तालाब की उपेक्षा क्षेत्र के विधायक व सांसद तथा प्रशासनिक तौर पर होते आ रहा है।
चुनाव आते ही इस पंचो सिंह पोखर के उद्धार की बड़ी-बड़ी बातें होती रही है। लेकिन किसी भी दल के नेता ने चुनाव बाद इस तालाब की सुधी नहीं ली है। जबकि गढ़़पुरा के लोगों के लिए यह एक मात्र तालाब है। जिसमें छठ जैसे महापर्व में सैकड़ों परिवार की महिलाएं अस्ताचलगामी सूर्य और उद्याचलगामी सूर्य को अर्घ्य देती है। वही विवाह, उपनयन संस्कार के बहुत सारे विध विधान किए जाते हैं। फिर भी यह तालाब उपेक्षित पड़ा है।
इसी अपेक्षा का नतीजा है कि तालाब के उत्तरी भाग में बसे लोगों के द्वारा मुहाने को अतिक्रमण कर झोपड़ी खड़ा कर लिया है। वही गंदगी इस तालाब में डाला करता है। इसके लिए बार बार सीओ को लोगों द्वारा कहे जाने के बाद इस पर ध्यान नहीं दिया गया। कुछ दिन पूर्व 20 सूत्री की बैठक में भी इस तालाब के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण मुद्दा 20 सूत्री अध्यक्ष कमल किशोर झा और सदस्यों ने उठाया था। |
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