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जागरण संवाददाता, हसनपुर। तहसील क्षेत्र में मां गंगा की रेती की भूमि पर खेती करने के लिए एक बार फिर किसानों के बीच खींचतान होने के साथ ही हंगामा होने का दौर शुरू हो गया है। इसी बीच सत्ता पक्ष के कुछ सफेद पोश भी सक्रिय होकर अपना उल्लू सीधा करने की फिराक में लगे हैं। गुरुवार को देहरी गुर्जर के सामने गंगा की रेती पर कई गांव के किसान एकत्र हो गए। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
उल्लेखनीय है कि गंगा की रेती पर खेती करने को लेकर किसानों के बीच कई बार पहले भी बंदूकें गरजती रहीं हैं। गंगा नदी में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर गया है। हसनपुर तहसील क्षेत्र में जीरो प्वाइंट मोहम्मदाबाद से हरिबाबा के धाम तक करीब 44 किलोमीटर के एरिया में हजारों बीघा गंगा की रेती खाली हुई है। जिसमें गंगा किनारे के गांवों के लोग लौकी, खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूज, टमाटर तथा गेहूं की फसल की उगाई करने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
क्या हो लोगों का तर्क?
गंगा किनारे के गांवों के लोगों का तर्क है कि बाढ़ में उनकी फसलें बर्बाद हुई हैं इसलिए रेती की भूमि पर खेती करने का अधिकार उनका ही बनता है। लेकिन भूमि खाली होते ही वन विभाग के कर्मचारी तथा राजस्व लेखपाल भी किसानों से सांठगांठ करने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
वहीं, गुरुवार को देहरी गुर्जर व शहवाजपुर गांव के सामने गंगा किनारे काफी संख्या में एकत्र किसानों के बीच सत्तापक्ष के एक क्षेत्रीय पदाधिकारी पहुंच गए। किसानों का दबी जुबान कहना है कि उनसे पांच सौ रुपये बीघा की मांग की जा रही है। किसानों ने मौके की वीडियो भी बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित की है।
सरकार अपनी किसी भी भूमि को ठेके पर नहीं देती है। इसलिए सरकारी भूमि पर किसी भी किसान को अवैध कब्जा करके फसल उगाने की जरूरत नहीं है। गंगा की रेती पर अवैध कब्जा करने की जानकारी मिली है। टीम बनाकर जांच कराई जाएगी तथा जिसका भी अवैध कब्जा मिलेगा कार्रवाई की जाएगी। -पुष्कर नाथ चौधरी, एसडीएम हसनपुर। |
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