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उत्तराखंड में लक्सर सब स्टेशन का बढ़ेगा लोड, पूहाना–रुड़की लाइन की बढ़ेगी करंट वहन क्षमता

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发表于 2025-10-28 09:34:24 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

हरिद्वार ज़िले के 132 केवी लक्सर सबस्टेशन की क्षमता बढ़ाने व पूहाना–रुड़की ट्रांसमिशन लाइन की वहन क्षमता बढ़ाने को लेकर नियामक आयोग ने दिया फैसला



राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन आफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को सशर्त मंज़ूरी दे दी है। पहली परियोजना हरिद्वार ज़िले के 132 केवी लक्सर सबस्टेशन की क्षमता बढ़ाने से जुड़ी है, जबकि दूसरी परियोजना 220 केवी पूहाना–रुड़की ट्रांसमिशन लाइन की वहन क्षमता बढ़ाने से संबंधित है। आयोग ने दोनों प्रस्तावों की गहन समीक्षा करने के बाद सशर्त स्वीकृति जारी की है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

लक्सर सबस्टेशन से जुड़ी परियोजना में वर्तमान में तीन 40 एमवीए ट्रांसफार्मर स्थापित हैं, जिनकी कुल क्षमता 120 एमवीए है। सबस्टेशन पर कुल लोड लगभग 155 एमवीए तक पहुंच गया है और ट्रांसफार्मर लगभग 90 प्रतिशत तक ओवरलोड स्थिति में चल रहे हैं। इस कारण पिटकुल ने एक 40 एमवीए ट्रांसफार्मर को 80 एमवीए ट्रांसफार्मर से बदलने का प्रस्ताव दिया, जिससे कुल क्षमता बढ़कर 160 एमवीए हो जाएगी।

परियोजना की प्रारंभिक लागत 18.43 करोड़ थी, जिसे संशोधित डीपीआर में बढ़ाकर 24.36 करोड़ किया गया। आयोग ने तकनीकी समीक्षा के दौरान पाया कि प्रोजेक्ट के कुछ प्रस्ताव उचित नहीं हैं। इसलिए इन हिस्सों को अस्वीकृत कर दिया गया। हालांकि, आयोग ने ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने और उससे संबंधित उपकरणों जैसे करंट ट्रांसफार्मर आदि के कार्य को मंज़ूरी दे दी।

आयोग ने निर्देश दिया कि पिटकुल 15 दिनों में संशोधित लागत का विवरण प्रस्तुत करे और एक महीने के भीतर राज्य सरकार से इक्विटी अंशदान की स्वीकृति का प्रमाण दे। इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि सभी कार्य प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के तहत किए जाएं।  

दूसरी ओर, 220 केवी पूहाना–रुड़की लाइन से संबंधित परियोजना में वर्तमान में एसीएसआर ज़ेब्रा कंडक्टर उपयोग किए जा रहे हैं, जिनकी अधिकतम करंट वहन क्षमता लगभग 650 एम्पियर है। गर्मियों के दौरान यह लाइन 600 से 800 एम्पियर तक लोड वहन करती है, जिससे ओवरहीटिंग जैसी समस्या सामने आती हैं।

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इस स्थिति को सुधारने के लिए पिटकुल ने लाइन को एचटीएलएस (हाई टेंपरेचर लो सैग) कंडक्टर से री-कंडक्टर करने का प्रस्ताव दिया, जिसकी करंट क्षमता लगभग 1600 एम्पियर है। परियोजना की लागत 13.95 करोड़ निर्धारित की गई थी, जिसे 15 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया। आयोग ने परियोजना की तकनीकी व आर्थिक समीक्षा के बाद 12.89 करोड़ की मंज़ूरी दी और कुछ आवश्यक शर्तों के साथ कार्य आरंभ करने की अनुमति दी।

आयोग ने दोनों मामलों में यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल प्रस्तुत लागत को प्रावधिक माना जाएगा। अंतिम लागत का निर्धारण ट्रू-अप प्रक्रिया के समय किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर गलत या अधूरी जानकारी सामने आती है, तो आयोग स्वीकृति को निरस्त कर सकता है। साथ ही, आयोग ने राज्य सरकार को सलाह दी कि वह इक्विटी अंशदान सुनिश्चित करे ताकि परियोजना बिना वित्तीय अड़चन के पूरी हो सकें।
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