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दुबई में भारतीय हस्तशिल्प ने बटोरी वाहवाही, गिफ्ट्स एंड लाइफस्टाइल प्रदर्शनी में भारतीय डिजाइन की धूम

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发表于 2025-11-26 23:18:35 | 显示全部楼层 |阅读模式
  



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई में चल रहे गिफ्ट्स एंड लाइफस्टाइल मिडिल ईस्ट-2025 प्रदर्शनी के दूसरे दिन हस्तशिल्प पर संवाद भी हुआ। ग्राहकों ने अपने-अपने अनुभव साझा किये। साथ ही उन्हें किस तरह के उत्पाद चाहिए आदि के बारे में भी बताया गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस सत्र का उद्देश्य वैश्विक खरीदारों, सोर्सिंग पेशेवरों और भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों को एक साझा मंच पर लाकर नए व्यावसायिक अवसरों की पहचान करना था। वहीं मुरादाबाद के निर्यातकों द्वारा लगाए गए स्टालों पर भी ग्राहकों ने उत्पादों को लेकर खूब चर्चा की। डिजाइनिंग के साथ ही नक्काशी वाले उत्पाद को भी पसंद किया गया। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इस प्रदर्शनी से निर्यातकों को आर्डर मिलेंगे।

बुधवार को हुए संवाद में ईपीसीएच अध्यक्ष डा. नीरज खन्ना, मुख्य संयोजक अवधेश अग्रवाल ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक प्रतिनिधियों, खरीदार और हस्तशिल्प निर्यातकों के साथ बातचीत की। इसमें विदेशी आयातक और लाइफस्टाइल उत्पाद के कारोबारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया था। ईपीसीएच अध्यक्ष ने कहा कि भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र अपनी परंपरा, शिल्पकौशल और सांस्कृतिक विविधता के कारण दुनिया में विशिष्ट पहचान रखता है।

आज समय की मांग है कि भारत की छवि केवल एक सप्लायर कंट्री के रूप में नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरे। हमें भारत आपूर्तिकर्ता से भारत–निर्माता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। भारतीय कारीगरों की पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं अब आधुनिक डिजाइन और वैश्विक बाजार की मांगों के अनुरूप ढल रही हैं। ईपीसीएच लगातार ऐसे अवसर उपलब्ध करा रहा है जहां भारतीय शिल्पकार सीधे विदेशी खरीदारों से संवाद कर सकें।

इसी क्रम में उन्होंने सभी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक प्रतिनिधियों को आगामी आईएचजीएफ दिल्ली मेला स्प्रिंग 2026 में भाग लेने का निमंत्रण दिया, जो 14 से 18 फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में होगा। यह मेला दुनिया के सबसे बड़े हस्तशिल्प मेलों में से एक है, जो आयातकों, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं के लिए एक उत्कृष्ट सोर्सिंग प्लेटफार्म प्रदान करता है। मुख्य संयोजक अवधेश अग्रवाल ने कहा कि भारतीय शिल्पकार रचनात्मकता, सौंदर्य और उपयोगिता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं।

इस तरह के संवादात्मक सत्र भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की प्राथमिकताओं को समझने और उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में मदद करते हैं। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक आरके वर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारतीय हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,123 करोड़ (3,918 मिलियन डालर) रहा, जबकि केवल यूएई को हुआ निर्यात 2,544.92 करोड़ (300.90 मिलियन डालर) तक पहुंच गया।

इस दौरान रुपये के मूल्य के हिसाब से 24 प्रतिशत और डालर के हिसाब से 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ईपीसीएच का उद्देश्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं बल्कि भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक पहचान को और सुदृढ़ बनाना है। परिषद देशभर के कारीगरों, शिल्पकारों और उद्यमियों को प्रशिक्षण, डिज़ाइन नवाचार, बाजार सूचना और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी जैसे अवसर प्रदान करती है।
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