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दिल्ली ब्लास्ट के बाद हापुड़ में आतंकी कनेक्शन की जांच तेज, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से क्यों जुड़ा मामला

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发表于 2025-11-26 23:17:21 | 显示全部楼层 |阅读模式
  



केशव त्यागी, हापुड़। दिल्ली के ला किला के पास कार ब्लास्ट की घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छोटे से जिले हापुड़ को देखें तो यह भी बारूद के ढेर पर सवार है। साल दर साल यहां से जुड़े आतंकी मॉड्यूल, जासूस और हथियार सप्लाई के मामले सामने आते रहे हैं। हाल ही में दिल्ली ब्लास्ट के बाद पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए हापुड़ के पिलखुवा में कुख्यात आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के रिश्तेदारों से सघन पूछताछ की है। यह पहली बार नहीं है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

1990 से लेकर 2025 तक जिले ने ऐसे दर्जनों आतंकियों को पनाह दी है, जिनके तार आईएसआई, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और आईएसआईएस जैसे संगठनों से रहे हैं।

हापुड़ का आतंकी इतिहास 1990 के दशक से शुरू होता है, जब यहां अपहरणकर्ताओं ने शरणस्थली बनाई। अक्टूबर 1994 में चार विदेशी नागरिकों का अपहरण करके उन्हें हापुड़ और पड़ोसी सहारनपुर में छिपाया गया। उसी दौर में दिसंबर 1993 में दर्जनभर ट्रेनों जैसे राजधानी एक्सप्रेस, दिल्ली-हावड़ा एक्सप्रेस, फ्लाई क्वीन एक्सप्रेस, सूरत-मुंबई एक्सप्रेस और एपी एक्सप्रेस में सीरियल बम धमाके हुए, जिसमें दो की मौत और 22 लोग घायल हुए थे। इनका मास्टरमाइंड था पिलखुआ के मोहल्ला लुहारन का अब्दुल करीम उर्फ टुंडा। जो लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, आईएसआई, इंडियन मुजाहिदीन और हूजी बब्बर खालसा जैसे संगठनों का प्रमुख सदस्य था। टुंडा को 2013 में गिरफ्तार किया गया, लेकिन उसके परिवार के सदस्य आज भी निगरानी में हैं।
मदरसे में मिला था पाक प्रशिक्षित आतंकी

30 अप्रैल 2001 को एक पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकी को स्थानीय मदरसे से गिरफ्तार किया गया था। यह मामला जिले के धार्मिक संस्थानों में छिपे खतरे की पहली बड़ी मिसाल बना। फिर 22 मार्च 2002 को कोतवाली पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने फ्रीगंज रोड पर मुठभेड़ के बाद लश्कर-ए-तैयबा के चार खुंखार आतंकवादी कल्लन, शमीम, रईस और साजिद को गिरफ्तार किया। तत्कालीन एसटीएफ निरीक्षक दुष्यंत बालियान के नेतृत्व में यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में पोटा (प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म एक्ट) के तहत पहला दर्ज मुकदमा बना। इन आतंकियों के पास से हथियार और विस्फोटक बरामद हुए, जो दिल्ली-एनसीआर पर हमले की साजिश रच रहे थे।
आईएसआईएस लिंक और मुंबई कनेक्शन

2010 के बाद हापुड़ आतंकी फंडिंग और जासूसी का हॉट स्पॉट बन गया। वर्ष 2013 में वसीम उर्फ भूरा को गिरफ्तार किया गया, उसके पास से पाकिस्तान से जुड़े नकली नोट बरामद हुए, जो टेरर फंडिंग के लिए इस्तेमाल हो रहे थे। वर्ष 2016 में एक संदिग्ध व्यक्ति पकड़ा गया, जो हापुड़ के किसी स्कूल में शिक्षक के रूप में काम करता था।

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वहीं, जांच में उसके आईएसआईएस से तार जुड़े पाए गए। उसी साल 26/11 मुंबई हमलों के मुख्य डेविड हेडली का जिले से कनेक्शन सामने आया। उसने हापुड़ में पनाह ली थी और स्थानीय संपर्कों का इस्तेमाल किया। जनवरी 2019 में एनआईए ने हापुड़ सहित चार जिलों में छापामारी की, चार संदिग्धों को हिरासत में लिया। इनमें से कुछ दौलाना, वैठ, अठसैनी और बदराखा इलाकों के युवक थे, जो मदरसों और अमरोहा जैसे पड़ोसी जिलों से जुड़े थे।
जासूसी व हथियार सप्लाई की सप्लाई का गढ़

सात जुलाई 2020 को यूपी एटीएस ने गढ़ रोड की एक मार्बल दुकान से मेरठ के किठौर के जावेद को गिरफ्तार किया, जो खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट (केएलएफ) को अवैध हथियार सप्लाई कर रहा था। उसके खिलाफ पंजाब के मोहाली में मुकदमा दर्ज था। जनवरी 2021 में बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के बिहूनी गांव के पूर्व भारतीय सैनिक सौरभ शर्मा को पाकिस्तान के लिए जासूसी और टेरर फंडिंग के आरोप में एसटीएफ ने पकड़ा।

नवंबर 2023 में पिलखुआ के सद्दीकपुरा में छिपे गाजियाबाद के फरीदनगर के रियाजुद्दीन को आईएसआई के लिए जासूसी करते पकड़ा गया। उसके खातों से 70 लाख का संदिग्ध लेन-देन सामने आया। फरवरी 2024 में थाना देहात के श्यामपुर के सतेंद्र सिवाल, जो मास्को में भारतीय दूतावास में तैनात थे, उसे आईएसआई एजेंट साबित कर एटीएस ने गिरफ्तार किया। दिल्ली ब्लास्ट के बाद हापुड़ में हाई अलर्ट है।
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