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न बैंड-बाजा, न दहेज — हर मेहमान को दिया पौधा, महज 60 बारातियों की मौजूदगी में हुई अनोखी शादी बनी सामाजिक मिसाल

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论坛元老

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发表于 2025-11-26 22:52:37 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

मिलनी समारोह में एक-दूसरे को भेंट किए पौधा।  



जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। सेक्टर-17 निवासी सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट संजीव कौरा और उनकी धर्मपत्नी रितु कौरा ने विवाह समारोह में पर्यावरण संरक्षण को महत्व देकर सामाजिक मिसाल प्रस्तुत की। बेहद सादगी से हुई शादी में मिलनी (मिल्ली) और आए सभी मेहमानों का स्वागत पौधे और बीज भेंट कर किया गया। कौर दंपती ने अपने इकलौते बेटे लक्ष्य पवन श्याम की शादी में दहेज भी नहीं लिया।

कौरा दंपती की हमेशा से यही सोच थी कि बेटे की शादी बेहद सादगी से करेंगे और किसी प्रकार का दहेज या फिर भेंट स्वीकार नहीं करेंगे। बेटे ने भी माता-पिता की इस सोच का समर्थन किया। लक्ष्य पवन श्याम कौरा ने प्रिस्टन यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं और अपना व्यवसाय करते हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

बहू पूजा मलिक उद्यमी हैं। पूजा के पिता सुनील मलिक एक निजी कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हैं, जबकि मां रूपा मलिक गृहिणी तथा भाई अर्जुन मलिक गोल्फ कोच हैं। पूजा का परिवार बल्लभगढ़ में रहता है।
शोर से दूर सिर्फ 30 बराती रहे मौजूद

शादी समारोह के लिए जयपुर में एक ऐतिहासिक सामोद गांव को चुना गया। सामोद अपनी कलात्मक वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यह अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। गांव अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है, खासकर वर्षा के मौसम में जब यह किसी हिल स्टेशन जैसा लगता है।

सामौद गांव में बेहद सादगी से बरात निकली। बरात में न बैंड-बाजा और न आतिशबाजी। पूरी तरह से दिखावे से रहित शादी में वर पक्ष की ओर से 30 और वधू पक्ष की ओर से 30 खास मेहमान आए थे।  
शादी के बाद वर और वधू ने रोपा पौधा

पिता सुनील मलिक बताते हैं कि अपनी बेटी पूजा मलिक के लिए लक्ष्य पवन श्याम कौरा जैसा लड़का ही ढूंढ रहे थे। लक्ष्य पवन व कौरा परिवार की विचाराधारा मिली तो रिश्ता तय हो गया। सुनील मलिक और संजीव कौरा ने बताया कि लंबे समय से औद्याेगिक नगरी फरीदाबाद में रह रहे हैं।

नवंबर से जनवरी तक पूरे एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बेहद बढ़ जाता है। अपने स्तर पर आस-पास के हिस्सों में पौधे भी लगाते हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सभी को जागरूकता दिखानी होगी। हमने एक अनोखे तरीके से समाज को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जागरूक किया है।

इसके साथ ही दहेज से दूरी बनाने का भी संदेश दिया है। वर और वधू ने वेदी के पास और घर के आंगन में एक-एक भी लगाया। वर-वधू के अनुसार यह पौधा रिश्ते का जो विकास, समानता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी में जड़ें जमाने का प्रतीक है।
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