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दिल्ली में कुत्तों का आतंक, तीन साल में चार गुना बढ़े मामले

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发表于 2025-11-26 22:48:08 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

दिल्ली में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ रहा है, जिससे कुत्ते के काटने के मामलों में भारी वृद्धि हुई है।



अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला समय के अनुकूल है। दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। पिछले तीन सालों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

2022 में जहाँ केवल 6,691 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2024 तक यह संख्या 25,210 तक पहुँचने का अनुमान है। पिछले तीन सालों में दिल्ली में यह चार गुना वृद्धि, और 2025 तक 40,000 से ज़्यादा मामलों की अनुमानित वृद्धि, सिर्फ़ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि एक गंभीर जन सुरक्षा संकट है। विशेषज्ञ इसे जन स्वास्थ्य के लिए एक “गंभीर चेतावनी संकेत“ मानते हैं।

एमसीडी के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के नवीनतम आँकड़े भी संकेत देते हैं कि आवारा कुत्ते दिल्ली के लिए एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। इस संबंध में देश भर में स्थिति कम गंभीर नहीं है। 2024 में, भारत में कुत्तों के काटने के 3.71 मिलियन मामले दर्ज किए गए, यानी औसतन हर दिन 10,000 से ज़्यादा लोगों को कुत्तों ने काटा।

दिल्ली में यह समस्या मुख्य रूप से आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या (लगभग 8,00,000 से ज़्यादा) और कुत्तों की नसबंदी की कमी के कारण है। आँकड़े बताते हैं कि 2023-24 में केवल 79,959 कुत्तों की नसबंदी की गई, जबकि आवश्यक लक्ष्य 2,50,000 से ज़्यादा का था। इससे दिल्ली में कुत्तों का आतंक और बढ़ गया है।
वर्षवार आंकड़े

  • 2022: 6,691 मामले (महामारी के दौरान रिपोर्टिंग सीमित थी)
  • 2023: 17,874 मामले
  • 2024: 25,210 मामले
  • 2025: 26,234 मामले (अक्टूबर तक)


इस वर्ष यह संख्या 40,000 से अधिक होने की उम्मीद


एमसीडी, आईडीएसपी के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक 26,234 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें एमसीडी अस्पतालों में 9,920 और एंटी-रेबीज टीकाकरण केंद्रों में 15,010 मामले शामिल हैं। सफदरजंग अस्पताल में 2021 से जुलाई 2025 तक 91,009 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्षों की तुलना में 43.6 प्रतिशत की वृद्धि है।

वर्तमान मासिक औसत 2,600 से 2,700 मामले हैं, जिनके वर्ष के अंत तक 40,000 से 45,000 तक पहुँचने की उम्मीद है। यह 2024 की तुलना में लगभग 59 प्रतिशत की वृद्धि है।

पशु चिकित्सक डॉ. अजय गुप्ता के अनुसार, यह वृद्धि नसबंदी लक्ष्य पूरा न होने का परिणाम है। पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए और कुत्तों को खुले में भोजन खोजने से रोकने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार किया जाना चाहिए।
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