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Valmikinagar Tiger Reserve: चार महीने बाद जंगल सफारी का आगाज; भालू, सांभर और हिरण के दीदार से सैलानी हुए गदगद

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चार महीने बाद वाल्मिकी टाइगर रिजर्व का हुआ भव्य शुभारंभ। फोटो जागरण



संवाद सूत्र, वाल्मीकिनगर। वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र अंतर्गत स्थित होटल वाल्मीकि विहार से गुरुवार की सुबह छह बजे इस वर्ष के जंगल सफारी सत्र की औपचारिक शुरुआत हुई।

पहले दिन 200 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया, जिनमें भालू, हिरण, सांभर जैसे कई वन्य जीवों को देखने का रोमांचक अनुभव मिला।

वन संरक्षक डॉ. नेशामणि और डीएफओ विकास अहलावत ने हरी झंडी दिखाकर सफारी जीपों को रवाना किया, जिससे चार महीने के बाद बंद पड़े पर्यटन सत्र का सफल शुभारंभ हुआ।

सुबह के इस सत्र में विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता आलोक अमृतांशु, राजन कुमार, और राजू कुमार जंगल सफारी पर जाने वाले पहले पर्यटक थे।

इनके साथ दो अन्य सफारी जीप भी जंगल की ओर रवाना हुईं, जिनमें लखनऊ से आए सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट के पर्यटक डॉ. एहसास ओमीन, मोतिहारी के अरशद जमील, और गोरखपुर के अभिषेक विवेक अपने परिवार के साथ शामिल थे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

पहले सफारी में दिखा भालू

पर्यटकों को जंगल सफारी के दौरान भालू का दीदार हुआ, जिससे सभी काफी रोमांचित हुए। मोतिहारी से आए पर्यटक अरशद जमील ने बताया कि वाल्मीकिनगर में उनकी यह पहली यात्रा है, और उन्होंने भालू, सांभर, हिरण, मोर सहित अनेक पक्षियों को करीब से देखा।

वहीं, राजन कुमार ने कहा कि वे कई बार जंगल सफारी कर चुके हैं, लेकिन पहली बार भालू को इतने करीब से देखने का मौका मिला, जिससे वे बेहद खुश हैं।

वन संरक्षक डॉ. नेशामणि ने बताया कि जानवरों के प्रजनन एवं मानसून सीजन को देखते हुए चार महीने तक जंगल सफारी को बंद रखा गया था। अब इस सत्र की शुरुआत के साथ ही वन विभाग प्राइवेट जीपों को जंगल सफारी चलाने की अनुमति देगा। इच्छुक स्थानीय लोग वन विभाग से संपर्क कर अपनी अनुमति सुनिश्चित कर सकते हैं।

वाल्मीकिनगर, जो भारत-नेपाल सीमा पर स्थित है, महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। नारायणी-गंडकी नदी की कल-कल बहती धारा, नेपाल के ऊंचे पहाड़, और घने जंगल इस क्षेत्र की प्रमुख विशेषताएं हैं।

टाइगर रिजर्व के जंगलों में बाघ, गैंडा, भालू, हिरण सहित अनेक मांसाहारी और शाकाहारी जीव जंतु तथा विविध प्रकार के पक्षी निवास करते हैं, जिनका दीदार जंगल सफारी के दौरान पर्यटक कर पाते हैं।

वन क्षेत्र में महर्षि वाल्मीकि का आश्रम तथा प्राचीन काल के कालेश्वर मंदिर, जटाशंकर मंदिर, नरदेवी मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थल हैं, जहां पर्यटक श्रद्धा से दर्शन करते हैं। इसके अलावा यहां कैनोपी वॉक और गंडक नदी में राफ्टिंग का भी मजा लिया जा सकता है, जो साहसिक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।

वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व न केवल वन्यजीवन संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि पर्यटकों के लिए एक प्राकृतिक और सांस्कृतिक अनुभव का अद्भुत केंद्र भी है, जहां हर आने वाला जंगल की सुंदरता और यहां के जीव-जंतुओं के करीब होने का सुखद अनुभव लेकर लौटता है। इस तरह से जंगल सफारी सत्र का पुनः आरंभ स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए खुशी और उम्मीद की नई किरण लेकर आया है।
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