CasinoGames 发表于 2025-10-28 10:22:20

कसबा में घर के ही भंवर में फंस सकती है NDA और महागठबंधन की कश्ती, बागी बिगाड़ेंगे खेल

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प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)



प्रकाश वत्स, पूर्णिया। जिले के कसबा विधानसभा क्षेत्र में रणक्षेत्र सज चुका है। महागठबंधन में यह सीट कांग्रेस के हिस्से में है। राजग में अंत-अंत में यह सीट लोजपा-आर के खाते में चली गई है। दोनों ओर के प्रत्याशी नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं और चुनाव प्रचार में भी उतर चुके हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

सीट व टिकट पर घमासान का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। दोनों ही गठबंधनों के घर में ही भंवर तैयार है। ऐसे में किनारा तक कश्ती ले जाना किसी के लिए भी आसान नहीं है।

अनुमान के विपरीत दोनों की गठबंधन की ओर से नये पहलवान मैदान में हैं। महागठबंधन में कांग्रेस ने अपने हैट्रिक लगाने वाले विधायक अफाक आलम को बेटिकट कर दिया है। पार्टी ने यहां पूर्व प्रमुख इरफान आलम को मैदान में उतारा है।

अफाक आलम बगावत का झंडा थाम मैदान में हैं और अपने फैसले पर अडिग हैं। इस क्षेत्र से हैट्रिक सहित चार जीत दर्ज करने वाले अफाक आलम का निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में मैदान में रहना कांग्रेस की राह में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है।

इस परेशानी को एआईएमआईएम और बढ़ाने में पूरा जोर लगा रही है। पार्टी ने यहां से मु. इत्तेफाक आलम उर्फ मुन्ना को मैदान में उतारा है।

इधर राजग की नाव भी मझधार में ही दिख रही है। गत चुनाव में यह सीट हम के हिस्से में थी। हम के जिलाध्यक्ष राजेंद्र यादव मैदान में उतरे थे। यद्यपि वे तीसरे स्थान पर रहे थे। भाजपा के पूर्व विधायक प्रदीप कुमार दास लोजपा-आर की टिकट से मैदान में उतर उनका खेल बिगाड़ दिया था। प्रदीप कुमार दास दूसरे स्थान पर रहे थे।

प्रदीप दास की बाद में भाजपा में वापसी हो गई थी, इस बार यह सीट भाजपा के कोटे में आने व उन्हें मैदान में उतारने का भरोसा भी दिया गया था। ऐन मौके पर यह सीट लोजपा-आर के खाते में चला गया। ऐसे में भाजपा के पूर्व विधायक प्रदीप कुमार दास के साथ हम के जिलाध्यक्ष राजेंद्र यादव बगावत का झंडा थाम मैदान में उतर गए हैं।

लोजपा आर ने यहां से नितेश कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। नितेश कुमार सिंह की चुनाव से पूर्व पार्टी में सक्रियता नहीं रही थी, इस चलते गठबंधन के अन्य दलों के कार्यकर्ता व नेता को अलग ही टीस है।

भाजपा के एक अन्य नेता किशोर जायसवाल भी यहां निर्दल मैदान में उतर गए हैं। ऐसे में दोनों गठबंधनों में अपने ही घर की घेराबंदी बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है।
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