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Bhagalpur News: मुस्लिमों की आबादी सबसे ज्यादा, फिर भी 7 विधानसभा में बस 1 टिकट

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मुस्लिमों की आबादी सबसे ज्यादा, फिर भी 7 विधानसभा में बस 1 टिकट



अभिषेक प्रकाश, भागलपुर। विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, भागलपुर जिले में सियासी माहौल अब पूरी तरह चुनावी दंगल के रंग में रंग चुका है। सात विधानसभा क्षेत्रों वाले इस जिले में अब हर पार्टी अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही अब जातीय और धार्मिक समीकरणों की गोलबंदी खुलकर सामने आने लगी है। दिलचस्प यह है कि जिले की कुल आबादी में मुस्लिम वोटरों की हिस्सेदारी 18.28 प्रतिशत होने के बावजूद बड़ी पार्टियों ने इस बार उन्हें प्रतिनिधित्व देने में खास उत्साह नहीं दिखाया है।
मैदान में सिर्फ चार, राजनीतिक दल से एक

भागलपुर जिले की सात विधानसभा सीटों भागलपुर, नाथनगर, कहलगांव, सुल्तानगंज, बिहपुर, गोपालपुर और पीरपैंती से इस बार कुल 85 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें मुस्लिम प्रत्याशी सिर्फ चार हैं। महागठबंधन ने राजद कोटे से अंतिम समय में शेख जियाउल हसन को टिकट देकर मुस्लिम समाज की भागीदारी का प्रतिनिधित्व दिखाने की कोशिश की है।

इसके अलावा यहां से एक मंजर आलम निर्दलिय मैदान में हैं। दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी ने सुल्तानगंज से मतिउर रहमान को मैदान में उतारा है, जबकि जनसुराज पार्टी ने कहलगांव से मंजर आलम को टिकट दिया है। नाथनगर विधानसभा में लंबे समय तक प्रत्याशी के रूप में अबू केसर का नाम चर्चे में रहा, पर टिकट बंटवारे के आखिरी पल में समीकरण बदल गया।

भागलपुर सीट पर कांग्रेस ने फिर से अजीत शर्मा पर भरोसा जताया, जिससे राजद खेमे में असंतोष भी पनपा। वहीं राजद से जुड़े डिप्टी मेयर सलाउद्दीन अहसन ने निर्दलीय लड़ने की घोषणा भी की, हालांकि 20 अक्टूबर को पार्टी नेताओं के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने नामांकन वापस लेने का फैसला किया।

कहलगांव जहां जिले का सर्वाधिक मुस्लिम वोटर है वहां पर महागठबंधन से दो-दो प्रत्याशी मैदान में है। वही हाल सुल्तानगंज का भी है। अभी महागठबंधन से राजद और कांग्रेस आमने-सामने है। सुल्तानगंज में भी मुस्लिम वोटर तीसरे नंबर पर है।
मुस्लिम वोट सभी को, उम्मीदवारों से परहेज

भागलपुर की राजनीति में एम फैक्टर (मुस्लिम वोटर फैक्टर) हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। यही वजह है कि चुनाव आते ही हर दल इस तबके को साधने की कोशिश में जुट जाता है। महागठबंधन जहां इस वोट बैंक को अपने पारंपरिक आधार के रूप में देखता है, वहीं एनडीए भी सामाजिक समीकरणों के जरिये इसे अपने पक्ष में झुकाने की रणनीति बनाता है। फिर भी, जब उम्मीदवार चयन की बारी आई तो ज्यादातर दलों ने मुस्लिम समाज को टिकट देने से परहेज किया।
2020 में मुस्लिम प्रत्याशियों की संख्या ज्यादा थी

पिछले विधानसभा चुनाव (2020) में जिले से कुल 95 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें 10 मुस्लिम उम्मीदवार शामिल थे। उस समय राजद ने नाथनगर से अली अशरफ सिद्दीकी पर भरोसा जताया था और वह सीट महागठबंधन की झोली में गई थी। इसके अलावा भागलपुर से नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी और आरएलएसपी ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे।

नाथनगर से भी तीन मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में थे, एक राजद, एक जन अधिकार पार्टी से और एक निर्दलीय। बिहपुर में तीन मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें एक निर्दलीय, एक बसपा और एक जन अधिकार पार्टी से था। गोपालपुर में जन अधिकार पार्टी ने मुस्लिम प्रत्याशी दिया था, जबकि कहलगांव में भारतीय सब लोग पार्टी ने एक मुस्लिम उम्मीदवार उतारा था।
भागलपुर संसदीय क्षेत्र में अलग-अलग जातियों की आबादी का यह है हाल



    जाति प्रतिशत


   मुस्लिम
   18.28


   यादव
   11.81


   ब्राह्मण
   5.11


   कुशवाहा
   4.95


   धानुक
   4.33


   रविदास
   4.24


   वैश्य
   3.88


   भूमिहार
   3.84


   राजपूत
   3.56


   कुर्मी
   3.41


   तेली
   3.29


   पासवान
   3.00


   अन्य जातियां
   14.05




(श्रोत - यह आंकड़े जातिगत सर्वे की रिपोर्ट से लिए गए हैं।)
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