CasinoGames 发表于 2025-10-28 10:09:12

महागठबंधन की सीट पर अंतिम क्षण में बड़ा उलटफेर मां को मिला सिंबल, पर नामांकन में उतरी उनकी बेटी

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अंतिम क्षण में बड़ा उलटफेर



संवाद सूत्र, बाराचट्टी (गया)। गया जिला के बाराचट्टी आरक्षित विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर विरासत की सियासत का केंद्र बन गया है। महागठबंधन ने पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक दिवंगत भगवती देवी की पुत्री समता देवी को प्रत्याशी घोषित कर क्षेत्र में उत्साह भर दिया था, लेकिन सोमवार को अंतिम क्षण में पार्टी ने टिकट बदल दिया। नामांकन का समय आते-आते समता देवी की जगह उनकी बेटी तन्नुश्री कुमारी को राजद का सिंबल जारी कर दिया गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

रविवार को दिनभर क्षेत्र में यह संदेश फैल गया था कि समता देवी को टिकट मिला है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने बधाई दी, पोस्टर और बैनर तैयार होने लगे। लेकिन सोमवार दोपहर को राजद मुख्यालय से नया सिंबल पत्र जारी हुआ, जिस पर प्रत्याशी के रूप में तन्नुश्री कुमारी का नाम था। सिंबल सोमवार को आने के बाद ही मयके बाराचट्टी से तन्नुश्री कुमारी ने कार्यकर्ताओं के साथ शेरघाटी अनुमंडल कार्यालय जाकर नामांकन किया, जबकि समता देवी को दिया गया सिंबल यूं ही उनके पास रह गया।

इस अप्रत्याशित बदलाव से न सिर्फ राजद कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी है, बल्कि क्षेत्र में तरह-तरह के कयासों का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि क्या यह कदम रणनीतिक रूप से लिया गया है या अंतिम समय में किसी दबाव का परिणाम था। हालांकि, कई जानकार मानते हैं कि पार्टी ने भगवती देवी की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की कोशिश की है और इसलिए तन्नुश्री को आगे किया गया है।

उधर, एनडीए की ओर से हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्युलर ने एक बार फिर ज्योति देवी पर भरोसा जताया है। ज्योति देवी, हम पार्टी के संरक्षक एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की समधन और बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन की सास हैं। वे इस सीट से तीसरी बार मैदान में हैं और पिछली दोनों बार जीत दर्ज कर चुकी हैं। एनडीए खेमे में उनकी राजनीतिक पकड़ और जनसंपर्क को सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।

अब मुकाबला दो राजनीतिक विरासतों के बीच दिलचस्प बन गया है एक ओर भगवती देवी की नातिन तन्नुश्री कुमारी, तो दूसरी ओर मांझी परिवार की सियासत को आगे बढ़ाती ज्योति देवी। हालांकि, इस पारंपरिक जंग के बीच जन सुराज पार्टी ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। पार्टी ने हेमंत पासवान को उम्मीदवार बनाया है, जो पहली बार चुनावी मैदान में हैं और खुद को “विरासत से अलग नया विकल्प” के रूप में पेश कर रहे हैं।

अब चर्चा है कि क्या जनता एक बार फिर विरासत की राजनीति को समर्थन देगी या नए चेहरे को मौका देगी। बाराचट्टी की गलियों में गूंज रहा सवाल यही है,क्या फिर चलेगा विरासत का सिक्का या इस बार बदल जाएगी सियासत की दिशा?।
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