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Bihar Election: बिहार चुनाव में बागियों का बोलबाला... भितरघात की आंच से झुलस रही कांगेस और राजद, भाजपा की भी तबीयत खराब

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Bihar Election: भागलपुर की सातों विधानसभा सीटों पर टिकट बंटवारे की चिंगारी अब बगावत में बदल चुकी है।



संजय सिंह, भागलपुर। Bihar Election 2025 बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भागलपुर जिले की सियासत में असंतोष की गर्माहट बढ़ गई है। कुछ निर्दलीय उम्मीदवार चुनौती बनकर उभरे हैं, तो कुछ नए संगठन जन सुराज व वीआइपी असंतुष्टों का नया ठिकाना बन गया है। भाजपा, जदयू, राजद और कांग्रेस सभी डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। बड़े नेता लगातार संपर्क साध रहे हैं ताकि किसी तरह बिखराव रोका जा सके। इस बार भागलपुर की असली जंग बाहरी विपक्ष से नहीं, बल्कि भीतर के विरोध से है। सातों विधानसभा सीटों पर टिकट बंटवारे के बाद उठी चिंगारी अब बगावत की लपटों में बदल चुकी है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

कांग्रेस और भाजपा में दोहरी बगावत

भागलपुर शहरी सीट पर स्थिति सबसे जटिल है। भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ पार्टी की नेत्री प्रीति शेखर ने नाराजगी जताई और चुनाव लड़ने की घोषणा की। लेकिन बड़े नेताओं ने आश्वासन देकर उन्हें मना लिया। वहीं भाजपा नेता अर्जित चौबे भी असंतुष्ट हैं। यह दोनों असंतुष्ट भाजपा उम्मीदवार रोहित पांडेय के लिए फायदे मंद साबित होंगे, यह कहना मुश्किल है। कांग्रेस उम्मीदवार अजीत शर्मा के खिलाफ राजद नेता और शहर के डिप्टी मेयर सलाउद्दीन अहसन भी बागी तेवर में हैं। डिप्टी मेयर की सक्रियता ने दोनों दलों के समीकरण उलझा दिए हैं, जिससे मुकाबला और रोचक बन गया है।

नाथनगर में लोजपा उम्मीदवार पर नाराजगी

नाथनगर सीट पर लोजपा द्वारा मिथुन यादव को टिकट दिए जाने से स्थानीय नेताओं में असंतोष है। उनका आरोप है कि संगठन की राय को दरकिनार कर बाहरी चेहरे को प्राथमिकता दी गई। नाराज कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता से लोजपा के प्रचार अभियान पर असर पड़ सकता है। वहीं राजद और कांग्रेस भी अपने उम्मीदवार उतारकर मुकाबले में हैं।

सुल्तानगंज में कांग्रेस को करारा झटका

सुल्तानगंज सीट पर कांग्रेस को तब झटका लगा जब वरिष्ठ नेता आनंद माधव ने टिकट वितरण से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी। उनके हटने से स्थानीय इकाई में उथल-पुथल मची है। जदयू को यहां कोई चुनौती नहीं है, लेकिन कांग्रेस को अपने संगठनिक ढांचे को संभालना होगा। चर्चा है कि राजद भी इस सीट पर उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रहा है।

कहलगांव में पवन यादव की निर्दलीय लड़ाई

कहलगांव सीट से मौजूदा विधायक पवन यादव अब भाजपा से टिकट कटने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी बन गए हैं। उन्होंने कहा कि वे जनता के भरोसे चुनाव लड़ेंगे। उनके इस कदम ने जदयू को भी चुनौती में डाल दिया है। कांग्रेस से प्रवीण सिंह कुशवाहा और राजद से रजनीश कुमार के बीच मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

पीरपैंती में बगावत ऐसी कि आर या पार

पीरपैंती सीट पर टिकट कटने से नाराज ललन पासवान ने भी भाजपा पार्टी से इस्तीफा दे दिया और मोर्चा खोल दिया है। उन्हें मुरारी पासवान को सीधे इस बागी से जूझना होगा।

बिहपुर में जन सुराज के साथ पवन चौधरी

बिहपुर में भाजपा को भितरघात का सामना है। पार्टी नेता पवन चौधरी ने टिकट न मिलने पर नाराजगी जताई और जन सुराज का दामन थाम लिया। उनकी स्थानीय पकड़ भाजपा के लिए चिंता का विषय बन सकती है। वहीं जदयू सांसद अजय मंडल की करीबी अपर्णा कुमारी ने भी पार्टी छोड़कर वीआइपी के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।

गोपालपुर में जदयू का असंतुष्टों से सामना

गोपालपुर में जदयू के भीतर असंतोष बढ़ा है। मौजूदा विधायक गोपाल मंडल के समर्थक टिकट वितरण से नाराज हैं। कुछ कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय नामांकन किया है, जबकि कुछ प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं। वीआइपी ने भी यहां से अपना उम्मीदवार उतारा है। भागलपुर की सातों सीटों पर अब मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि दलों की साख के बीच भी है।

जहां-जहां बागी खड़े हैं, वहां मूल उम्मीदवारों की जीत का समीकरण उलझ गया है। कुछ बागी नई पार्टी के सहारे मैदान में हैं, तो कुछ पूरी तरह निर्दलीय हैं। यह चुनाव तय करेगा कि कौन-सा दल अपने असंतुष्टों को मना पाएगा और कौन भीतर से ही हार जाएगा। इस बार भागलपुर की जंग का असली चेहरा भीतर के विरोध में ही नजर आ रहा है।
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