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Patna News: नकली मेहंदी ने बिगाड़ा करवाचौथ का जश्न; शरीर में फैला जहर, फफोले और सूजन से जूझ रही महिला

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नकली मेहंदी से शरीर में फैला जहर, महिला गंभीर। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, पटना। करवाचौथ पर सजने-संवरने को मेहंदी लगवाना पूर्वी चंपारण की 34 वर्षीय युवती को इस कदर भारी पड़ा कि उन्हें गंभीर हालत में आइजीआइएमएस की इमरजेंसी में भर्ती कराना पड़ा।

मेहंदी लगवाने के दो घंटे बाद हाथ-पैर में शुरू हुई खुजली व जलन को गंभीरता से नहीं ले और गहरा करने के लिए लगाए रखने से इसका जहर पूरे शरीर में फैल गया। इसके बाद हाथ-पैर से लेकर चेहरे व आंखों तक में फफोले पड़ गए। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

संक्रमण के खून में पहुंचने से आंखों में खून से उतर आया। इसके बाद स्वजन रमाकांत यादव उसे लेकर यहां आए। चिकित्साधीक्षक डा. मनीष मंडल ने बताया कि युवती की हालत गंभीर है। मेडिसिन इमरजेंसी के डॉ. अभय कुमार, डॉ. सिद्धार्थ सिंह उनका उपचार कर रहे हैं।
खतरनाक रसायन से एलर्जी की आशंका

डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि युवती की स्थिति स्थिर है। वरिष्ठ डाक्टर उपचार कर रहे हैं। मेहंदी में मिले किस रसायन के इतने खतरनाक लक्षण उभरे, ये जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा। इस रसायन का शरीर पर और क्या दुष्प्रभाव हुआ है, वह जांच के बाद ही पता चलेगा।

वहीं, युवती के स्वजन रमाकांत के अनुसार वह कोई दवा नहीं लेती जिसके दुष्प्रभाव की आशंका हो। जिस मेहंदी का प्रयोग किया गया था, उस पर हर्बल लिखा हुआ था। खुजली व जलन के बाद ज्यों-ज्यों उसे खुजलाया गया फफोले पड़ते गए और शरीर में सूजन आ गई।
मेहंदी का ऐसा दुष्प्रभाव पहले नहीं देखा

इमरजेंसी मेडिसिन के डॉ. सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि दवाओं के दुष्प्रभाव के तो ऐसे मामले बहुत आए हैं, लेकिन मेहंदी से किसी मरीज का ऐसा हाल पहली बार देखा है। उनके हाथ-पैर, चेहरा झुलस सा गया है और आंखों के आसपास तक की त्वचा निकल गई है।

नकली मेहंदी को काला या गाढ़ा भूरा करने के लिए कौन सा केमिकल मिलाया गया था, और शरीर के विभिन्न अंगों पर उसका कितना दुष्प्रभाव पड़ा है, यह जांच में ही पता चलेगा। शनिवार को स्थिति काफी स्पष्ट हो जाएगी।
मेहंदी का ऐसा दुष्प्रभाव नहीं देखा

पीएमसीएच के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार झा ने कहा कि मेहंदी से कई लोगों को एलर्जी की आशंका होती है। हाथ-पैर जहां इसे लगाते हैं, वहीं इसका दुष्प्रभाव होता है।

जिस तरह के लक्षण हैं वैसा अक्सर दवाओं से रिएक्शन में होता है। यदि युवती कोई दवा नहीं खाती थी तो यह किसी ऐसे रसायन से हुआ है जो त्वचा के संपर्क में आकर खून तक पहुंच गया है। रोगी को हाई डोज स्टेरायड देनी होगी।
प्राकृतिक मेहंदी ही सबसे बेहतर

आज बहुत से व्यापारी डाई की तरह टिकाऊ व रंग गहरा करने के लिए उसमें मिलाया जाने वाला पैरा-फेनिलीन डायमीन (पीपीडी) समेत कई प्रकार के रसायन मिला रहे हैं। कुटीर उद्योगों में बनने के कारण इनकी गुणवत्ता की कोई जांच नहीं होती है।

ऐसे में लोगों को खरीदारी के पहले चाहिए कि मेहंदी की गंध पर ध्यान दें। असली मेंहदी में हल्की मिट्टी जैसी तो नकली में तेज केमिकल या परफ्यूम की गंध आती है। प्राकृतिक मेंहदी का रंग 6–8 घंटे बाद गहरा होता है जबकि नकली मेंहदी 30 मिनट में ही काली हो जाती है।

असली मेंहदी का पाउडर हरा-भूरा होता है, नकली का गहरा काला या लाल झलक लिए होता है। लगाने से पहले थोड़ी मात्रा कलाई पर लगाकर 10 मिनट रुकें, जलन या खुजली महसूस हो तो इस्तेमाल नहीं करें।
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