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पटना जू में पटरियों पर सरपट दौड़ेगी टॉय ट्रेन, जू का भ्रमण होगा रोमांचकारी

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संजय गांधी जैविक उद्यान पटना



जागरण संवाददाता, पटना। संजय गांधी जैविक उद्यान पटना जू में फिर से टॉय ट्रेन पटरियों पर सरपट दौड़ेगी। जू प्रशासन की ओर से दिसंबर से काम तेजी से आरंभ होने की संभावना नहीं है। मार्च 2026 तक कार्य को पूरा होने के आसार है। इसके बाद ट्रेन का परिचालन होगा। ट्रैक निर्माण से संबंधित सामग्रियों का टेंडर फाइनल हो चुका है। कार्य के लिए 9.88 करोड़ रुपये की राशि जू प्रशासन ने दानापुर रेल मंडल को भेजा है। बीते वर्ष पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और दानापुर रेल मंडल के बीच एमओयू साइन हुआ था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
इलेक्ट्रिक इंजन से चलेगी ट्रेन

पटना जू में चलने वाली टॉय ट्रेन चार बोगियों का होगा। जो इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित होगा। इसमें 40 यात्रियों की बैठने की व्यवस्था होगी। पटरियों की लंबाइ पहले की तुलना में घटकर 3.70 किमी से 3.5 किमी की होगी। वर्तमान में दो हाल्ट राइनो एनक्लोजर और मछली घर के पास हाेगा। जू प्रशासन की ओर से जू में रखरखाव में कमी के कारण सेवा बंद हो गई थी। वर्तमान में आचार संहिता के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है। चुनाव संपन्न होने के बाद कार्य आरंभ होने की संभावना है।

ट्रेन के रास्ते में आने वाली गुफा दर्शकों को रोमांचित करेगी। 40 मिनट की सैर कर लोग वन्य प्राणियों के करतब का आनंद उठा पाएंगे। टॉय ट्रेन विभिन्न वन्य जीवों के केज होते हुए गैंडा हाल्ट, मछली घर हाल्ट आदि से गुजरेगी। जिस रास्ते से होकर ट्रेन गुजरेगी उसके लिए विशेष डिजायन तैयार किया जाएगा। इसके जरिए लोगों को पर्यावरण व वन्य जीवों के संरक्षण का भी संदेश दिया जाएगा। यात्रा को मनोरंजक बनाने को लेकर कृत्रिम टनल और झरनों का निर्माण किया जाएगा। जिसमें सफर के दौरान यात्रियों को रोमांच का अनुभव हाेगा। हाल्ट और स्टेशन को आधुनिक रूप में विकसित किया जाएगा। ऐसे में लोगों को जू का भ्रमण करना रोमांचकारी होगा।


48 वर्ष पूर्व हुआ था परिचालन

पटना जू में सर्वप्रथम शिशु रेल का परिचालन 1977 में आरंभ किया गया था। जू के निदेशक हेमंत पाटिल ने बताया कि राज्य सरकार के अनुरोध पर भारतीय रेलवे द्वारा बच्चों की रेलगाड़ी एक इंजन एवं दो डिब्बे उपहार के रूप में पटना जू को दिए गए है। शिशु रेल पर्यटकों, विशेषकर बच्चों में काफी लोकप्रिय हुई थी।

पटरी की लंबाई महज 1.59 किमी थी। कालांतर में शिशु रेल काफी पुरानी हो जाने के कारण इसका रख रखाव में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। 2004 में राज्य सरकार के अनुरोध पर रेल मंत्रालय द्वारा चार डिब्बे वाली एक नई शिशु रेल को उपहार स्वरूप पटना जू को दिया गया था। अगस्त 2015 में दर्शकों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से 17 अगस्त 2015 से शिशु रेल क परिचालन बंद हो गया है।
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