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Chandra Dosh Upay: मानसिक तनाव से निजात पाने के लिए करें ये उपाय, पूरी होगी मनचाही मुराद

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Chandra Dosh Upay: चंद्र देव को कैसे प्रसन्न करें?



आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। चंद्रमा सभी का मन और इंद्रियों तथा भावनाओं का स्वामी होता है। चंद्रमा स्वभाव से स्त्रीवत होता है और इसे दिव्य माता का प्रतीक माना जाता है। यह आकर्षण और सौम्य व स्त्रैण गुणों जैसे कोमल अभिव्यक्ति, देखभाल और पोषण का प्रतिनिधित्व करता है। यह जल तत्व का अधिपति है और हमारे शरीर में जल तत्व को नियंत्रित करता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

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कुंडली में चंद्रमा हमारे मनोवैज्ञानिक स्वभाव, हमारी बुद्धि और मानसिक शांति का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसा माना गया है कि चंद्रमा यश, लोकप्रियता और लोगों का प्रेम प्रदान करता है। अच्छी स्थिति में चंद्रमा हमारे मानसिक संतुलन को मजबूत करता है और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति और साहस देता है। एक शुभ चंद्रमा व्यक्ति को जीवन के सभी क्षेत्रों में सौभाग्य प्रदान करता है।
चंद्रमा के हल्के दोषों के उपाय

[*]जातक को अपने घर में चावल, गंगाजल और चांदी का अच्छा भंडार रखना चाहिए। इससे चंद्रमा की शक्ति में वृद्धि होती है।


[*]जातक को भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए।


[*]जातक को नियमित रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए, विशेषकर सोमवार को।


[*]स्नान के जल में थोड़ी सी गंगाजल की बूंदें मिलानी चाहिए।


[*]जातक को अपने घर में कपूर जलाना चाहिए।


[*]घर में गौमूत्र का छिड़काव करना चाहिए, जिससे वातावरण का आध्यात्मिक शुद्धिकरण होता है।


[*]जातक को अपनी माता के साथ मधुर संबंध बनाए रखना चाहिए और हर महत्वपूर्ण कार्य से पहले माता का आशीर्वाद लेना चाहिए।


[*]जातक को कभी भी किसी विधवा स्त्री से दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए, बल्कि संभव हो तो उनकी सहायता करनी चाहिए।


[*]दूध में शहद मिलाकर पीना चाहिए।


[*]रोज देशी घी का सेवन करना चाहिए।


[*]मंदिर में मिश्री का दान करना चाहिए।

चंद्रमा दोषों के उपाय

चंद्रमा की मूर्ति स्फटिक से बनानी चाहिए। मूर्ति में चंद्रदेव को सफेद वस्त्रों में, दस घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथ पर सवार, सफेद आभूषणों से सजे हुए, एक हाथ में गदा और दूसरे हाथ से आशीर्वाद देते हुए प्रदर्शित किया जाना चाहिए।



चंद्रदेव की पूजा मूर्ति के रंग के वस्त्र, पुष्प, सुगंधित द्रव्य, अगरबत्ती, दीप, हवन सामग्री, धूप, गुग्गुल आदि से करनी चाहिए। ग्रह की धातु और ग्रह को प्रिय भोजन वस्तु का श्रद्धापूर्वक दान करना चाहिए जिससे ग्रह दोष की शांति हो सके।



महर्षि पराशर के अनुसार, चंद्रमा के मंत्र का ग्यारह हज़ार बार जाप करना चाहिए।



चंद्रमा के हवन के लिए पलाश की लकड़ी का उपयोग करना चाहिए। हवन सामग्री में शहद, घी, दही या दूध मिलाकर आहुति देनी चाहिए और मंत्रों का 108 या 28 बार जाप करते हुए हवन करना चाहिए।



उसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। दूध में पकाए हुए चावल चंद्रमा के दोष निवारण में आवश्यक माने गए हैं। पूजा के उपरांत यजमान की श्रद्धा के अनुसार और ब्राह्मणों की संतुष्टि हेतु दक्षिणा देनी चाहिए।


मंत्र जप

सामान्यतः नीचे दिए गए मंत्रों का जाप चंद्रमा के दोषों को कम करने के लिए किया जाता है। बीज मंत्र को अधिक प्रभावशाली माना गया है।
चंद्रमा के लिए मंत्र:
“ॐ चन्द्राय नमः”
चंद्रमा के लिए बीज मंत्र:

“ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः



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लेखक: आनंद सागर पाठक, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।
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