Bihar Politics: कांग्रेस में उबलता असंतोष, उम्मीदवारों की सूची जारी होने से पहले फूटा लावा
/file/upload/2025/10/5235391986253136910.webpराहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी होने से पहले ही कांग्रेस में घमासान मच गया है। पार्टी के भीतर असंतोष का ज्वालामुखी अब खुलकर फूट पड़ा है। दिल्ली से पटना पहुंचे कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम का कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध किया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
कई जिलों से आए कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए नेताओं पर टिकट बेचने के गंभीर आरोप लगाए। मारपीट के हालात ऐसे बने के वरिष्ठ नेताओं को किसी तरह से बाहर निकाला गया।
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने बिहार की लगभग 60 सीटों पर उम्मीदवार तय कर लिए हैं। जिनके नाम सूचीबद्ध किए गए हैं उनमें से अधिकांश उम्मीदवारों को फोन भी जाने शुरू हो गए हैं। लेकिन, पार्टी के लिए खून पसीना बहाने वाले नेताओं के नाम सूची में न होने की जानकारी मिलते ही पुराने कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों का गुस्सा फूट पड़ा।
पटना एयरपोर्ट पर नेताओं के उतरते ही कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। नेताओं पर पैसे लेकर टिकट बेेचने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोप लगाए। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने कहा कि वर्षों से पार्टी की सेवा करने वालों को किनारे कर बाहरी या पैराशूट प्रत्याशियों को तरजीह दी जा रही है। यहां तक की कई आपराधिक प्रवृति वाले उम्मीदवारों को भी मोटी रकम देकर टिकट बांटे गए हैं।
पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए कि स्थानीय नेताओं ने दिल्ली में आलाकमान को गलत रिपोर्ट बाहरी, आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को टिकट दिला लिए। एक कार्यकर्ता ने कहा हमने बूथ से लेकर सड़क तक कांग्रेस का झंडा उठाया, लेकिन टिकट उन लोगों को दिया जा रहा है जो पिछले चुनाव तक विरोधी दलों में थे।
कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि महीनों से यही बात कही जा रही थी कि योग्यता और जीतने की क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी। मगर अंदरखाने की खबर है कि कुछ सीटों पर आपसी गुटबाजी और सिफारिशों और टिकटों की खरीद-बिक्री की गई है।
राजनीति के जानकारों की माने तो टिकट बंटवारे के पहले कांग्रेस में टिकटों को लेकर शुुरू हुई कलह कांग्रेस के लिए नुकसानदेह हो सकती है। 2020 के चुनाव में पार्टी को 70 सीटों पर मौका मिला था, लेकिन इस बार महागठबंधन के भीतर उसकी स्थिति कमजोर बताई जा रही है। ऐसे में टिकट वितरण के दौरान बढ़ता असंतोष कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर भारी पड़ सकता है।
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