CasinoGames 发表于 2025-10-28 09:25:45

बदलते मौसम से गुरुग्राम में प्रदूषण की मार, सांसों पर संकट से बचाव को डॉक्टरों ने जारी की एडवाइजरी

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30 से 40 सांस के रोगी पहुंच रहे हैं अस्पताल में रोजाना।



जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। वायु प्रदूषण अस्थमा रोगियों के लिए खतरनाक साबित होने लगा है। दिवाली पर घरों में सफाई और रंगाई-पुताई सांस रोगियों के लिए समस्या बन गई है वहीं शहर में उड़ती धूल व धुएं से उनको सांस लेने में परेशानी हो रही है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

प्रदूषण कारक तत्व श्वास नलिकाओं के जरिए फेफड़ों में जाकर एलर्जी कर रहे हैं। इससे सांस रोगियों, अस्थमा पीड़ित बच्चे, युवा व बुजुर्गों के लिए परेशानी बन रही है। बीते कुछ दिनों में सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में अस्थमा रोगियों की संख्या में इजाफा दर्ज किया गया है।

इसके अलावा नाक, कान व गला रोगियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। चिकित्सकों की माने तो दीवाली पर अस्थमा रोगियों की संख्या तीन गुना तक बढ़ने की संभावना रहती हैं।

दिन और रात के मौसम में काफी बदलाव आया है। शरीर को चुभने वाली धूप अब सुहाने लग रही है। इसके अलावा दिन ढलने के बाद तापमान में 10 डिग्री की गिरावट आ जाती है। इससे अब रात में हल्की ठंड होने लगी है।

मौसम में बदलाव व त्योहार आते ही वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। बढ़ते प्रदूषण से साइनस, एलर्जी और हृदय रोगियों की भी परेशानी बढ़ने लगी है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को ओपीडी में 2765 मरीज पहुंचे। यहां रोजाना 50-60 मरीज सांस की समस्या से पीड़ित पहुंच रहे हैं। आम दिनों की अपेक्षा 20 प्रतिशत सांस के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है।

वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ. काजल कुमुद ने बताया कि सांस की समस्या से पीड़ितों मरीजों के इलाज इनहेलर, नेबुलाइजर, स्टेरायड से किया जा रहा है। वहीं जिन मरीजों को इनहेलर से राहत नहीं मिल रही उनके स्टेरायड इंजेक्शन लगाया जा रहा है।
नलिकाओं में सूजन आने से अस्थमा का अटैक व फूलती दम

चिकित्सक के मुताबिक, वातावरण में धूल-धुआं के साथ नाइट्रोजना का आकार और सल्फर डाइ आक्साइड का स्तर बढ़ा है। सुबह-शाम प्रदूषण कारक तत्वों की परत नीचे रहती है। जो सांस रोगियों, अस्थमा और टीबी पीड़ितों की नलिकाओं में जाकर एलर्जी करते हैं, इससे नलिकाओं में सूजन आने से अस्थमा का अटैक व दम फूलती है और खांसी आती है।
बचाव के उपाय

[*]अस्थमा रोगियों को धूल, मिट्टी या खुले वातावरण से बचना चाहिए।
[*]सांस फूलने लगे तो परिश्रम का काम नहीं करना चाहिए, धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
[*]ठंडे वातावरण में न रहें।
[*]अत्यधिक शारीरिक व्यायाम न करें।
[*]योगासन करने से सांस की बीमारी का इलाज करने में मदद मिलती है।
[*]ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करना चाहिए।
[*]इस समय प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है, ऐसे में रोगियों को मास्क लगाना चाहिए।


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अस्पताल में सांस के रोगियों के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाएं स्टाक में हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाएं चाकचौबंद हैं। इनहेलर, नेबुलाइजर व इंजेक्शन की भी पहले से व्यवस्था की गई है। इमरजेंसी वार्ड में गंभीर मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है।
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- डाॅ. लोकवीर, पीएमओ, नागरिक अस्पताल
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