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यूपी में मत्स्य मंत्री के छोड़ते ही नदी में उतराने लगीं मछलियां, मिनिस्टर बोले- ये तो...

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लखनऊ में सोमवार को गोमती नदी में मछलियां डालते मत्स्य विभाग मंत्री संजय निषाद।



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य विकास मंत्री संजय निषाद द्वारा गोमती नदी में की गई रिवर रैंचिंग (मछलियों के बच्चों को नदी में छोड़ना) सवालों में घिर गई है। सोमवार को जैसे ही मंत्री ने मछलियों को नदी में छोड़ना शुरू किया, वैसे ही कई मछलियां पानी में उतराने लगीं। जिन मछलियों की रिवर रैंचिंग की जा रही थी, उनमें कई मरी हुई थीं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मत्स्य मंत्री ने इसे बताया सामान्य

हालांकि मत्स्य मंत्री ने इसे सामान्य बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में मछलियों की मृत्यु दर 30 प्रतिशत हैं, हमने प्रयास कर इसे 10 प्रतिशत तक सीमित किया है। राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत गोमती रिवर फ्रंट स्थित न्यू लक्ष्मण पार्क में रिवर रैंचिंग-जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें मत्स्य विकास मंत्री ने उप्र मत्स्य विकास निगम द्वारा उपलब्ध कराई गईं दो लाख भारतीय मेजर कार्प मत्स्य बीज (रोहू, कतला और नैन) का नदी में संचय किया।

मंत्री अधिकारियों के साथ नाव में सवार होकर नदी के बीच में पहुंचे और मछलियों को पानी में छोड़ा गया। इस दौरान मरी हुई मछलियां पानी में उतराती रहीं। इसे लेकर मंत्री ने कहा कि नदी पारिस्थितिकीय प्रणाली के संरक्षण के लिए रिवर रैंचिंग प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्व में इसके लिए निजी हैचरी से मछलियां ली जाती थीं। हमने इस व्यवस्था को खत्म कर मत्स्य विकास निगम की हैचरी को जोड़ा है। मछलियों को लाने और नदी में छोड़ने की प्रक्रिया में कुछ की मृत्यु हो जाती है।

कम करने का कर रहे प्रयास

हम इसे कम करने का प्रयास कर रहे हैं और वर्तमान में यह पांच से 10 प्रतिशत तक है। नदी में प्रदूषण के प्रश्न पर कहा कि इसके लिए काम किया जा रहा है। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का मुख्य उद्देश्य नदियों में मत्स्य संसाधनों का पुनर्जीवन, पारंपरिक मछली पकड़ने के तरीकों को बढ़ावा देना, मछुआ समुदाय की आजीविका को मजबूत बनाना और जलीय जैव विविधता में वृद्धि करना है।

निर्देश दिए कि प्रदेश भर में रिवर रैचिंग कार्यक्रमों को निरंतर संचालित किया जाना चाहिए। इससे जलीय जैव विविधता में और वृद्धि होगी और नदियों में पारिस्थितिकीय तंत्र को बनाए रखने में सहायता मिलेगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए एयरेशन सिस्टम योजना एवं मछुआ दुर्घटना बीमा के छह लाभार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस दौरान प्रमुख सचिव मत्स्य विकास मुकेश मेश्राम, निदेशक एनएस रहमानी आदि उपस्थित रहे।
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