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बरेली में फाइलेरिया रोकथाम के लिए नाइट ब्लड सर्वे की बड़ी पहल, डब्ल्यूएचओ के निर्देश पर रात में खून की जांच शुरू

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प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



जागरण संवाददाता, बरेली। फाइलेरिया को लेकर जिले में बनीं 33 यूनिटों में खून के नमूनों की जांच में मलेरिया विभाग के लिए राहत वाली बात यह है कि इसकी रिपोर्ट में एक भी मरीज चिह्नित नहीं हुआ है। हालांकि विभाग ने अभी तीन यूनिट भमौरा, क्यारा और फरीदपुर को फाइलेरिया के लिहाज से अभी संवेदनशील माना है। इसके लिए यहां करीब 1800 लोगों के ब्लड सैंपल की जांच का लक्ष्य तय किया गया है। ताकि समय रहते लोगों को इस बीमारी की चपेट में आने से रोका जा सके। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जिले में फाइलेरिया के कुल 248 मरीज हैं, जिनमें हाथीपांव के 185 और हाइड्रोसील के 63 मरीज शामिल हैं। यह बीमारी लाइलाज है। हालांकि हाइड्रोसील के सभी रोगियों के आपरेशन हो चुके हैं। जबकि हाथी पांव से परेशान मरीजों के लिए विभाग मदद के तौर पर किट देती है, ताकि वे मरीज उससे साफ-सफाई करने के साथ दवा आदि लगा सके। यह बीमारी मच्छरों के काटने से होती है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिले में फाइलेरिया की बीमारी को प्रभावी ढंग से रोका जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मलेरिया को लेकर यहां 36 यूनिटें हैं। जहां इनकी जरूरी जांचों के साथ इलाज आदि मुहैया कराया जाता है। इसमें 33 यूनिटें ऐसी हैं, जहां लोगों के रक्त की जांच कराई गई और उसमें अब तक कोई केस फाइलेरिया का नहीं निकला है।

हालांकि तीन ब्लाक फरीदपुर, क्यारा और भमौरा ब्लाक को अभी संवेदनशील माना गया है। इसलिए यहां इस गंभीर बीमारी को फैलने से रेाकने के लिए विभाग ने कवायद शुरू की है। इन तीनों ही ब्लाकों में 26 नवंबर तक नाइट ब्लड सर्वे (एनबीएस) किया जाएगा। यहां दो–दो साइट, एक सेंटीनल और एक रेंडम साइट का चुनाव किया जाएगा। जहां पर रात में 10 से दो बजे तक 20 साल या इससे अधिक आयु के लोगों के रक्त के नमूने लिए जाएंगे।

रात में रक्त की जांच इसलिए की जाएगी, क्योंकि फाइलेरिया के परजीवी माइक्रोफ़ाइलेरिया रात में ही सक्रिय होते हैं। हर साइट से 300 रक्त के नमूने लिए जाएंगे। इस तरह तीन ब्लाक से कुल 1800 रक्त के नमूने लिए जाएंगे। यदि किसी व्यक्ति में माइक्रोफाइलेरिया पाया जाता है, तो उसका इलाज शुरू किया जाएगा और उसके परिवार के सदस्यों की भी जांच की जाएगी। वर्तमान में जिले के पांच ब्लाक फाइलेरिया की चपेट में हैं।
साल में तीन बार दवा खाने के बाद कम होता जाता खतरा

चिकित्सकों का कहना कि फाइलेरिया से बचाव के लिए हर साल दवाएं खिलाईं जाती है। इसमें गर्भवती महिलाओं सहित कुछ और मरीजों को छोड़कर बाकी लोग इस दवा का सेवन कर सकते है। अगर कोई तीन बार दवा खा लेता है तो उसमें फाइलेरिया के आने की आशंका काफी कम हो जाती है। हालांकि इसके लिए लोगों को जागरूक होना जरूरी है।
इन तरह से फैलता है मलेरिया

फाइलेरिया मच्छरों द्वारा फैलता है, खासकर परजीवी क्यूलैक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के जरिए। जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रस्त व्यक्ति को काटता है तो वह संक्रमित हो जाता है। फिर जब यह मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के विषाणु रक्त के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी फाइलेरिया से ग्रसित कर देते हैं। लेकिन ज्यादातर संक्रमण अज्ञात या मौन रहते हैं और लंबे समय बाद इनका पता चल पाता है। इस बीमारी का कारगर इलाज नहीं है। इसकी रोकथाम ही इसका समाधान है।
हाथी पांव से पीड़ितों को ये करना चाहिए



   - अपने पैर को साधारण साबुन व साफ पानी से रोज धोएं।


   - एक मुलायम और साफ कपड़े से अपने पैर को पोछिए।


   - पैर की सफाई करते समय ब्रश का प्रयोग न करें, इसे पैरों पर घाव हो सकते हैं।


   - जितना हो सके अपने पैर को आरामदायक स्थिति में उठाए रखें।


   - जितना हो सके व्यायाम करें, कहीं भी, कभी भी।


   - पैदल चलना अच्छा व्यायाम है।





फाइलेरिया की बीमारी काफी खतरनाक है। यहां तीन ब्लाकों में नाइट सर्वे कर लोगों के खून की जांच की जा रही है। 33 यूनिट में कराई गई जांचों में कोई मरीज चिह्नित नहीं है। बाकी तीन यूनिटों में भी प्रयास किया जा रहा है कि वहां इस बीमारी पर पूरी तरह से रोकथाम लग सके।

- डा. सत्येंद्र कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी





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