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बिहार विधानसभा परिणाम: मेयर डॉ. बसुंधरा ने उधार किया चुकता, सांसद निशिकांत ने निभाया पार्टी धर्म

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मेयर वसुंधरा और सांसद निशिकांत दुबे। (जागरण)



जागरण संवाददाता, भागलपुर। मेयर डॉ. बसुंधरा लाल ने अपना उधार चुकता कर दिया है। रोहित पांडेय ने डॉ. बसुंधरा लाल को मेयर के चुनाव में जीत दर्ज कराने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी।

रोहित पांडेय के बेहतर प्रबंधन की वजह से डॉ. बसुंधरा लाल ने जीत दर्ज की थी। उसी समय यह तय हो गया था कि अगर रोहित पांडेय को टिकट मिलता है तो तन-मन और धन से मेयर काम करेंगी और अगर मेयर को विधानसभा का टिकट मिलता है तो रोहित पांडेय मदद करेंगे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

रोहित पांडेय को भागलपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का टिकट मिलने के बाद मेयर डॉ. बसुंधरा लाल और उनके पति डॉ. बिहारी लाल ने तन-मन और धन से मेहनत की। दक्षिणी खंड जहां से भाजपा लगातार तीन बार से हार रही थी, में कड़ी मेहनत की और रोहित पांडेय को विजयी दिला दी।
सांसद ने की खुलकर मदद

इधर, गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने रोहित पांडेय की खुलकर मदद की। चुनाव प्रचार समाप्त वाले दिन आकर उन्होंने खेल ही बदल दी। जिस क्षेत्र में भाजपा कमजोर नजर आ रही थी, उस क्षेत्र में जाकर मतदाताओं को जिस तरह से रोहित पांडेय के पक्ष में किया, वह परिणाम देखने के बाद विरोधियों को समझ में आ गया।

गोड्डा सांसद को कटिहार व पूर्णिया जिले का प्रभारी बनाया गया था। पूर्णिया और कटिहार जिले की 18 सीटों पर एनडीए को मिली ऐतिहासिक जीत के पीछे गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे की चुनावी रणनीति को बेहद अहम माना जा रहा है। गोड्डा सांसद ने कटिहार व पूर्णिया के एनडीए प्रत्याशियों की जीत तो दिलाई ही, साथ जिले की सात सीटों पर बनाई रणनीति की वजह से सभी सीटें एनडीए की झोली में गईं।

दुबे कई रात भागलपुर में रहकर अपने क्षेत्र और जाति के बीच प्रभाव रखने वालों के साथ बैठक की। दुबे का व्यक्तिगत प्रभाव और सतत संपर्क अभियान निर्णायक साबित हुआ। बैठक और दौरे के क्रम में उन्होंने गोड्डा संसदीय क्षेत्र की उपलब्धि एयरपोर्ट, एक्स, सॉफ्टवेयर पार्क को प्रमुखता से रखा।
बदल दी तस्वीर

उन्होंने कहा कि यह यहां तभी हो सकता है जब आप एनडीए के प्रत्याशी को जीताएंगे। डबल इंजन की सरकार में क्षेत्र का विकास हो सकता है। जिसे कटिहार, पूर्णिया और भागलपुर जिले की जनता ने स्वीकार कर लिया। एक समय ऐसा लग रहा था कि नाथनगर सीट से मिथुन कुमार कमजोर पड़ रहे हैं। गंगोता का वोट किस ओर जाएगा, तय नहीं हो पा रहा था।

उन्होंने गंगोता सहित कई अन्य जातियों का वोट वाले लोगों से संपर्क किया और तीन दिनों में नाथनगर सीट की तस्वीर बदल गई। उन्होंने रोहित पांडेय के पक्ष में प्रचार समाप्त होने के बाद कई स्थानों पर चाय की चुस्की ली और भोजन किया। यह क्षेत्र वह था, जहां से रोहित पांडेय को वोट नहीं मिलने वाला था। साथ ही कांग्रेस प्रत्याशी के साथ काम कर चुके कई लोगों के साथ घूमना शुरू कर दिया।

इसका प्रभाव पड़ा और कांग्रेस से जुड़े लोगों ने रोहित पांडेय के पक्ष में मतदान कर दिया। साथ ही रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ, कर्मवीर सिंह ने यहीं रहकर शतरंज की चाल चलते रहे थे। प्रत्याशी का विरोध करने वालों को ऐसे उलझाया कि वे क्षेत्र में जाकर अपनी गतिविधि नहीं चला सके। विरोधियों को बाहर से आ रहे नेताओं की खातिरदारी में लगा दिया। इनका काम सिल्क चादर उढ़ाकर स्वागत करना था।
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