Sonpur Mela 2025: घोड़ों की हिनहिनाहट से गूंजा एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला, हाथी की प्रदर्शनी का इंतजार
/file/upload/2025/11/8897886306356347756.webpसोनपुर मेला घोड़ा बाजार
अमृतेश, छपरा। हरिहर क्षेत्र सोनपुर का ऐतिहासिक मेला, एक बार फिर अपनी पारंपरिक धरोहर के साथ जीवंत हो उठा है। गंगा और गंडक के संगम पर बसा यह पौराणिक मेला इस बार घोड़ों की हिनहिनाहट से गूंज रहा है।
पशु बाजार में देशभर के घोड़ा प्रेमी और खरीदार जुटे हैं। हर नस्ल, हर रंग के करीब 1760 घोड़े यहां पहुंचे हैं, जिनमें रेसिंग और शो के लिए विशेष नस्लें शामिल हैं। एशिया का प्रसिद्ध पशु मेला भी है।
घोड़ा बाजार में मची हलचल
सारण जिला पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉ. आलोक कुमार सिंह ने बताया कि इस बार मेला के पशु बाजार में छोटे-बड़े सभी नस्ल के घोड़े देखने को मिल रहे हैं। इनकी कीमत 46 हजार से लेकर 1.05 लाख रुपये तक है। अब तक सबसे महंगा घोड़ा 46 हजार रुपये में बिका है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
घोड़ा पालने के शौकीन देशभर से पहुंचे हैं। करीब 15 से 20 रईसों के तंबू सज चुके हैं, जहां एक से बढ़कर एक नायाब और रेसिंग घोड़े लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। मेला मैदान में इन तंबुओं के आसपास रौनक देखते ही बनती है।
गाय-बैल की संख्या कम, लेकिन उम्मीद बाकी
इस बार मेला में गाय और बैलों की तादाद अपेक्षाकृत कम है। पशुपालन विभाग के मुताबिक, दूसरे राज्यों से पशु लाने पर लगे प्रतिबंध का असर यहां दिख रहा है। अभी तक सिर्फ देसी और ट्रेलर नस्ल की गायें ही बाजार में पहुंची हैं।
बैलहट्टा में देशी नस्ल के बछौर बैल खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। इनकी कीमत 18,500 से 40,500 रुपये के बीच बताई जा रही है। विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में गाय-बैल की संख्या बढ़ेगी।
बकरी व कुत्ता बाजार भी सजे
मेला परिसर में बकरी बाजार और कुत्ता बाजार भी सज चुके हैं। इस बार 40 बकरियां और करीब 45 नस्ल के कुत्ते प्रदर्शनी में हैं। खास नस्लों के पालतू जानवरों को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं।
अब तक हाथी बाजार सूना
सोनपुर मेले की शान माना जाने वाला हाथी बाजार इस बार अब तक सूना है। सरकार द्वारा हाथियों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध जारी रहने के कारण यहां एक भी हाथी नहीं पहुंचा है।
हालांकि, परंपरा के मुताबिक कुछ हाथी मालिक शो के लिए अपने हाथी लेकर मेला पहुंचते हैं, जिनका इंतजार अभी भी मेला प्रेमियों को है।
स्वास्थ्य सुरक्षा की खास व्यवस्था
मेला मैदान में पशुओं की सुरक्षा और देखरेख के लिए जिला पशुपालन विभाग ने मोबाइल चिकित्सा कैंप लगाए हैं। यहां पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है ताकि मेला सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके।हरिहर क्षेत्र का यह मेला, हरिहरनाथ मंदिर की कथा से जुड़ा हुआ है, आज भी परंपरा और आधुनिकता का संगम बना हुआ है।
चंद्रगुप्त मौर्य, मुगल सम्राट अकबर ने खरीदा था हाथी
ऐतिहासिक रूप से, यह मेला मौर्य वंश के काल से ही पशुओं, विशेषकर हाथियों और घोड़ों के व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। चंद्रगुप्त मौर्य, मुगल सम्राट अकबर, और वीर कुंवर सिंह जैसे शासकों ने यहां से हाथी व घोड़ा की खरीद की थी।
इस बार भले ही हाथियों की कमी खल रही हो,लेकिन घोड़ों की टापों ने सोनपुर के इस ऐतिहासिक पशु मेले की रौनक फिर से लौटा दी है।
सोनपुर मेले (वर्ष 2025) में पशुओं का विवरण
पशु / पक्षी बिक्री विवरण
पशु / पक्षी का नाम कुल संख्या बिक्री अधिकतम मूल्य न्यूनतम मूल्य
घोड़ा
1760
04
1.5 लाख
46000
सोनपुर मेला में गाय की बिक्री का विवरण
गाय की प्रजाति कुल संख्या बिक्री अधिकतम मूल्य (₹) न्यूनतम मूल्य (₹)
गाय फिजियन
05
00
00
00
जर्सी
03
00
00
00
हरियाणा
00
00
00
00
थारपारकर
00
00
00
00
रेड सिंधी
00
00
00
00
ट्रेलर
00
00
00
00
शाहीवाल
00
00
00
00
देशी एवं अन्य
00
00
00
00
बैल के बिक्री का विवरण
बैल की प्रजाति अनुसार जानकारी
बैल की प्रजाति कुल संख्या बिक्री अधिकतम मूल्य न्यूनतम मूल्य
बैल बछौर देसी
10
00
00
00
हरियाणा
00
00
00
00
थारपारकर
00
00
00
00
भैंस के बिक्री का विवरण
प्रजाति कुल संख्या बिक्री अधिकतम मूल्य (₹) न्यूनतम मूल्य (₹)
भैंस मुर्रा
02
00
00
00
देसी एवं अन्य
00
00
00
00
अन्य के बिक्री का विवरण
पशु-कुल संख्या-बिक्री-अधिकतम मूल्य-न्यूनतम मूल्य
पशु का प्रकार कुल संख्या बिक्री अधिकतम मूल्य न्यूनतम मूल्य
बकरी एवं भेड़
40
00
00
00
कुक्कुट जाति
00
00
00
00
कुत्ता
45
00
00
00
अन्य पक्षी एवं जीव जंतु
00
00
00
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