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82 उम्मीदवार, 7 विधानसभाएं: भागलपुर की सियासी जंग में विकास या जात का पलड़ा भारी?

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भागलपुर की सियासी जमीन पर फिर गर्म हुआ महासमर। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर जिले की सियासी ज़मीन पर एक बार फिर चुनावी समर अपने पूरे उफान पर है। सात विधानसभा क्षेत्रों की यह जंग केवल प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा, परंपरा और जनभावनाओं की परीक्षा बन गई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जिले की पांच सीटों पर दो प्रमुख प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि दो सीटों पर बहुकोणीय संघर्ष ने राजनीति में रोमांच घोल दिया है। कहलगांव और गोपालपुर में पूर्व विधायक निर्दलीय बन मैदान में हैं, जिससे समीकरण उलझ गए हैं। प्रचार का शोर अब थम चुका है, लेकिन सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है।

गलियों और चौपालों में उम्मीदवारों के वादे, जातीय गणित और विकास के मुद्दे चर्चा का विषय बने हुए हैं। जनसुराज जैसे नए दल अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में जुटे हैं, तो पारंपरिक दल अपने पुराने गढ़ बचाने के लिए हर दांव आजमा रहे हैं।

82 प्रत्याशी जिले की सातों सीटों पर जनता की अदालत में हैं। हर सीट का गणित अलग, हर मुकाबले की कहानी जुदा। कहीं सीधी टक्कर है तो कहीं मुकाबला चतुष्कोणीय। भागलपुर की यह सियासी तस्वीर बताती है कि लोकतंत्र का असली उत्सव अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
भागलपुर विधानसभा : फिर वही चेहरा, फिर वही टक्कर

भागलपुर विधानसभा में कांग्रेस के अजीत शर्मा और भाजपा के रोहित पांडेय के बीच एक बार फिर कांटे की भिड़ंत है। दोनों ही प्रत्याशी अपनी जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

कांग्रेस जहां एम-वाई और पचपौनिया वोटरों के सहारे बढ़त का दावा कर रही है, वहीं भाजपा वैश्य, सवर्ण और पचपौनिया मतदाताओं के भरोसे मैदान में उतरी है। 2020 में भी यही मुकाबला हुआ था, जिसमें अजीत शर्मा ने 1130 मतों से जीत दर्ज की थी।

इस बार जन सुराज के अभय कांत झा तीसरे कोण के रूप में मैदान में हैं। बसपा की रेखा दास समेत कुल 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। भागलपुर की यह जंग सधी हुई रणनीति और जातीय समीकरणों के बीच बेहद दिलचस्प बन गई है।
पीरपैंती विधानसभा : पासवान बनाम पासवान की दिलचस्प जंग

पीरपैंती में इस बार भाजपा और राजद के बीच सीधी टक्कर है। भाजपा ने मौजूदा विधायक ललन कुमार का टिकट काटकर आरएसएस पृष्ठभूमि वाले मुरारी पासवान पर भरोसा जताया है।

वहीं राजद ने एक बार फिर रामविलास पासवान को मैदान में उतारा है, जिन्हें 2020 में भाजपा ने मात दी थी। जन सुराज के घनश्याम दास पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं और मुकाबले को रोचक बना रहे हैं।

कुल दस प्रत्याशी मैदान में हैं। यहां गंगोता, खरवार, रविदास और आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। सवर्ण वोटर भी किसी भी दल का खेल पलट सकते हैं। पीरपैंती की हवा में जातीय समीकरणों के साथ-साथ स्थानीय नाराजगी और नए चेहरों की चर्चा गर्म है।
नाथनगर विधानसभा : नए चेहरों से गर्म हुआ सियासी मैदान

नाथनगर विधानसभा में इस बार समीकरण पूरी तरह बदले हैं। राजद ने पूर्व प्रशासनिक अधिकारी जेड हसन को मैदान में उतारा है, जबकि एलजेपी (रामविलास) ने जिला परिषद अध्यक्ष मिथुन कुमार पर दांव लगाया है।

जन सुराज के अजय कुमार राय भी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं। राजद एम-वाई और सवर्ण मतदाताओं को साधने की कोशिश में है, वहीं एलजेपी (आर) दलित, यादव और गंगोता वोटरों पर भरोसा जता रही है।

बसपा के रविश चंद्र रवि कुशवाहा भी मैदान में हैं। कुल 15 प्रत्याशी चुनावी रण में हैं। नाथनगर की गलियों में हर किसी के जुबां पर यही सवाल है। इस बार किसका पल्ला भारी? मुकाबला सधा, सटीक और सस्पेंस से भरा हुआ है।
सुल्तानगंज विधानसभा : त्रिकोणीय जंग में सबकी नजर विकास बनाम जात पर

सुल्तानगंज विधानसभा में जदयू, कांग्रेस और राजद के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। जदयू ने मौजूदा विधायक ललित नारायण मंडल पर फिर भरोसा जताया है, वहीं कांग्रेस ने पुराने उम्मीदवार ललन कुमार को दोबारा मैदान में उतारा है। राजद ने वर्षों बाद चंदन कुमार को प्रत्याशी बनाया है।

जन सुराज से राकेश कुमार भी चुनावी दौड़ में हैं। कुल 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। जदयू विकास कार्यों का हवाला देकर मैदान में है, जबकि कांग्रेस और राजद एम-वाई और पचपौनिया समीकरण को मजबूत कर रहे हैं। जन सुराज अपनी मौजूदगी दर्ज कराने को बेताब है। सुल्तानगंज की सियासत इस बार जात, वर्ग और विकास। तीनों के संगम पर खड़ी है।
कहलगांव विधानसभा : बागियों से उलझा समीकरण, मुकाबला हुआ चतुष्कोणीय

कहलगांव विधानसभा में इस बार सियासी समीकरण बेहद उलझे हुए हैं। जदयू से शुभानंद मुकेश मैदान में हैं, जो पिछली बार कांग्रेस से चुनाव लड़े थे। भाजपा के बागी पूर्व विधायक पवन कुमार यादव निर्दलीय के रूप में मुकाबले को गर्माए हुए हैं।

कांग्रेस ने प्रवीण सिंह और राजद ने रजनीश भारती को प्रत्याशी बनाया है। जन सुराज से मंजर आलम भी मैदान में हैं। बसपा से भवेश कुमार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। कुल 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।

जातीय वोटरों की गोलबंदी और बागी उम्मीदवारों की सक्रियता ने मुकाबले को चार कोनों वाला बना दिया है। कहलगांव में जीत का रास्ता इस बार बेहद पेचीदा दिख रहा है।
बिहपुर विधानसभा : भाजपा बनाम वीआईपी, पुराने साथी आमने-सामने

बिहपुर विधानसभा में भाजपा और वीआईपी के बीच सीधी जंग है। भाजपा ने एक बार फिर कुमार शैलेंद्र को प्रत्याशी बनाया है, जिन्होंने 2020 में राजद के शैलेश कुमार को हराया था। इस बार शैलेश कुमार जदयू में हैं और भाजपा के समर्थन में सक्रिय हैं।

वीआईपी ने अर्पणा कुमारी को मैदान में उतारा है, जिन्हें महागठबंधन का समर्थन मिला है। राजद ने इस बार उम्मीदवार नहीं दिया है। जन सुराज से पवन चौधरी भी चुनाव में हैं।

कुल दस प्रत्याशी मैदान में हैं। भाजपा सवर्ण, गंगोता और दलित वोटरों पर भरोसा जता रही है, जबकि वीआईपी एम-वाई और मल्लाह वोटरों के सहारे नैया पार करने की जुगत में है। मुकाबला सीधा, सधा और दिलचस्प है।
गोपालपुर विधानसभा : जदयू और वीआईपी के बीच मुकाबला कड़ा

गोपालपुर विधानसभा में जदयू और वीआईपी के बीच मुकाबला कड़ा है। जदयू ने वर्तमान विधायक नरेंद्र कुमार नीरज का टिकट काटकर नया दांव खेला है। राजद ने पूर्व सांसद और पूर्व विधायक शैलेश कुमार को प्रत्याशी बनाया है, जबकि वीआईपी से प्रेम सागर मैदान में हैं।

जन सुराज के मंकेश्वर सिंह और निर्दलीय पूर्व विधायक नरेंद्र नीरज मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं। कुल दस प्रत्याशी मैदान में हैं। जदयू को गंगोता, वैश्य, सवर्ण और दलित मतदाताओं पर भरोसा है, जबकि वीआईपी एम-वाई और मल्लाह वोटरों पर निर्भर है।

पूर्व विधायक गोपाल मंडल की सक्रियता से समीकरण और जटिल हो गए हैं। गोपालपुर का चुनावी रण इस बार हर मोड़ पर अप्रत्याशित मोड़ लेने को तैयार है।
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