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Cough Syrup Deaths: कफ सिरप से मौतों की संख्या 20 के पार! राज्यों ने जहरीली दवाओं पर लगाया बैन, लेकिन जिम्मेदार कौन?

Coldrif Cough Syrup Deaths: मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटों में चार नई मौतों के साथ जहरीली कफ सिरप पीने से 20 बच्चों की मौत हो चुकी है। राजस्थान में भी इसी तरह के मामले सामने आए हैं। इसके जवाब में पंजाब, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड सहित कई राज्यों ने कोल्ड्रिफ पर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन एक जांच में पता चला है कि कुछ सर्दी-ज़ुकाम के सिरप अभी भी बेचे जा रहे हैं। मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप Coldrif से जुड़ी बच्चों की मौतों के बाद भी शोकाकुल माता-पिता अभी भी जवाब तलाश रहे हैं।



कोल्ड्रिफ पीने से अब तक 20 बच्चों की मौत हो चुकी है। मध्य प्रदेश पुलिस ने डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया है। लेकिन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस कदम की कड़ी निंदा की और सवाल उठाया कि दवा कंपनी को क्लीन चिट क्यों दी गई। डॉक्टरों द्वारा गिरफ्तारी का विरोध और दवा नियामकों से जवाबदेही की मांग के बीच अधिकारी जांच जारी रखे हुए हैं। लेकिन कई सवालों के अभी भी जवाब नहीं मिले हैं।





सूत्रों के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप (Coldrif cough syrup) के अन्य देशों को निर्यात पर भारत से स्पष्टीकरण मांगा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। मध्य प्रदेश में 20 बच्चों की मौत का कारण कोल्ड्रिफ कफ सिरप बताया गया है।





बच्चों को दी जाने वाली खांसी की दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर चिंताओं के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेदिक इलाज पूरी तरह से सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हैं। अखिल भारतीय चिकित्सक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. आर.पी. पाराशर ने कहा कि आयुर्वेदिक कफ सिरप, जड़ी-बूटियां और घरेलू इलाज दो साल से अधिक उम्र के बच्चों को बिना किसी डर के दिए जा सकते हैं।





स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) ने तीन अक्टूबर को सभी राज्यों को एक एडवाइजरी जारी कर दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाइयां देने पर प्रतिबंध लगा दिया था। एडवाइजरी के अनुसार, आमतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं देने की सलाह दी जाती है।





पांच साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार की दवा देने के बाद उसका सावधानीपूर्वक मूल्यांकन, कड़ी निगरानी और उचित खुराक, कम से कम अवधि और कई दवाओं के संयोजन से बचने के सख्त पालन के बाद किया जाना चाहिए। एडवाइजरी में बच्चों के लिए कफ सिरप के विवेकपूर्ण और तर्कसंगत नुस्खे और वितरण पर भी जोर दिया गया।




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डा. पाराशर ने बताया कि छह माह से कम उम्र के बच्चों को खांसी, जुकाम या ठंड लगने पर उनकी छाती पर हल्के गर्म घी या तेल से मालिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “बच्चों की माताओं को ऐसे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए जिसकी प्रकृति ठंडी होती हैं और शरीर में \“कफ\“ और \“दोष\“ बढ़ाते हैं। छह महीने से अधिक उम्र के बच्चों को तुलसी, अदरक, लौंग, काली मिर्च और खजूर के साथ दूध उबालकर पिलाया जा सकता है।“











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उन्होंने बताया कि यह दूध उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगा और खांसी-जुकाम से तुरंत राहत प्रदान करेगा। आयुर्वेदिक कफ सिरप तुलसी, मुलेठी, काकड़सिंगी, भारंगी, पुष्करमूल, बहेड़ा, पुदीना, पिप्पली, काली मिर्च, दालचीनी, तेजपत्ता और तालीसपत्र जैसी जड़ी-बूटियों से बनाए जाते हैं। डॉ. पाराशर ने बताया कि इनका बच्चों पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता।
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